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हर साल 23 जनवरी को ही क्यों होती है गणतंत्र दिवस की फुल ड्रेस रिहर्सल? जानिए वजह

Republic Day 2026: 26 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड से तीन दिन पहले हर साल 23 जनवरी को फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित की जाती है। क्या आप जानते हैं कि तीन दिन पहले ही फुल ड्रेस रिहर्सल क्यों आयोजित की जाती है। इस दिन का महत्व क्या है?

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क्या आप जानते हैं कि हर साल 23 जनवरी को ही क्यों होती है फुल ड्रेस रिहर्सल

देश में हर साल 26 जनवरी को बड़े ही भव्य और ऐतिहासिक तरीके से गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर होने वाली परेड न सिर्फ देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है, बल्कि यह राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी होती है। गणतंत्र दिवस की परेड से पहले आज के दिन यानी 23 जनवरी को हर साल फुल ड्रेस रिहर्सल होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस भव्य आयोजन से ठीक तीन दिन पहले ही यानी हर साल 23 जनवरी को गणतंत्र दिवस की फुल ड्रेस रिहर्सल क्यों आयोजित की जाती है? चलिए जानते हैं -

अब यह प्रश्न उठा है तो इसका उत्तर भी जरूर होगा ही। दरअसल, इसके पीछे कोई संयोग नहीं, बल्कि ठोस प्रशासनिक, सुरक्षा और परंपरागत कारण हैं। गणतंत्र दिवस परेड एक बहुत ही जटिल और उच्चस्तरीय आयोजन होता है। इसमें भारत की थलसेना, वायुसेना, नौसेना, अर्धसैनिक बल के साथ ही विभिन्न राज्यों की झांकियां, स्कूली बच्चे और भारतीय वायुसेना का फ्लाई-पास्ट भी शामिल होता है। ऐसे विशाल आयोजन के लिए एक अंतिम पूर्ण अभ्यास काफी जरूरी प्रक्रिया है। 23 जनवरी को होने वाली फुल ड्रेस रिहर्सल उसी अंतिम रिहर्सल का काम करती है, जिसमें हर गतिविधि ठीक उसी तरह होती है जैसे आगामी 26 जनवरी होने वाली होती है।

तैयारियों को परखने का अंतिम अवसर

फुल ड्रेस रिहर्सल को गणतंत्र दिवस से तीन दिन पहले आयोजित करने का एक बड़ा कारण सुधार और सुरक्षा से जुड़ा भी है। यदि मार्चिंग, तालमेल, साउंड सिस्टम, टाइम मैनेजमेंट या झांकियों में किसी तरह की कोई कमी दिखती है, तो उसे ठीक करने के लिए प्रशासन को पर्याप्त समय मिल जाता है। साथ ही सुरक्षा एजेंसियां भी इस दौरान भीड़ नियंत्रण, आपात स्थिति से निपटने और ट्रैफिक डायवर्जन की तैयारियों को अंतिम तौर पर टेस्ट कर लेती हैं।

गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है और देश के सबसे अधिक सुरक्षा वाले आयोजनों में से एक है। फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान पुलिस, अर्धसैनिक बल और खुफिया एजेंसियां अपनी रणनीति को वास्तविक हालात में परखती हैं। इससे किसी भी संभावित खतरे या सुरक्षा चूक की पहचान पहले ही की जाती है।

परंपरा बन गया फुल ड्रेस रिहर्सल

आजादी के बाद और संविधान लागू होने के इतने वर्षों में समय के साथ 23 जनवरी को फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित करना एक परंपरा बन चुका है। सभी विभाग इसी तारीख को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियां करते हैं, जिससे समन्वय और व्यवस्था बनी रहती है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती

गौरतलब है कि 23 जनवरी को ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती भी मनाई जाती है। हालांकि, फुल ड्रेस रिहर्सल आधिकारिक तौर पर इस कारण से नहीं रखी जाती, लेकिन यह तारीख देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ी होने के कारण प्रतीकात्मक महत्व जरूर रखती है।

कुल मिलाकर बात की जाए तो, 23 जनवरी को होने वाली फुल ड्रेस रिहर्सल का मकसद गणतंत्र दिवस समारोह को त्रुटिरहित, सुरक्षित और गरिमामय बनाना है, ताकि 26 जनवरी को पूरा देश गर्व के साथ इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बन सके।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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