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100 करोड़ का सपना,लोन का खेल और करोड़ों की ठगी... जानें कौन है लेडी नटवरलाल गरिमा सिंह?

गोरखपुर में करोड़ों रुपये के कथित लोन फ्रॉड मामले में गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह जेल में हैं। आरोप है कि गरिमा लोन दिलाने और पुराना कर्ज खत्म कराने का भरोसा देकर लोगों को जाल में फंसाती थी। इसी मामले के वादी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. परमात्मा सिंह ने कथित 1.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और बैंक रिकवरी के दबाव के बीच 8वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी।

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अफसर की बेटी बनी ठग। (फोटो- ai)

गोरखपुर में बैंक लोन के नाम पर सामने आए कथित करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है,गरिमा सिंह का नाम इस पूरे मामले के केंद्र में आता जा रहा है। पुलिस ने इस मामले में खुलासा किया है कि शातिर ठग गरिमा ऐसे लोगों को निशाना बनाती थी जिन्हें तत्काल लोन की जरूरत होती थी या जो पहले से किसी कर्ज की किस्त चुका रहे थे। वो उन्हें भरोसा दिलाती थी कि नया लोन लेकर पुराना कर्ज खत्म कराया जा सकता है और नई किस्तों की जिम्मेदारी वह खुद उठाएगी।

रेलवे स्टेशन अधीक्षक की है बेटी

जांच में सामने आया है कि गरिमा सिंह गोरखपुर के एम्स थाना क्षेत्र स्थित महादेव झारखंडी कॉलोनी निवासी रेलवे स्टेशन अधीक्षक ध्रुव नारायण सिंह की बेटी है। उसकी शादी वर्ष 2020 में कुशीनगर के भानु प्रताप सिंह से हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, भानु ठेकेदारी का काम करते थे, लेकिन काम कमजोर होने के बाद वह पत्नी और बच्चों के साथ ससुराल में रहने लगे। गरिमा के दो बच्चे होने की जानकारी भी सामने आई है।

ऐसे फैलाया ठगी का नेटवर्क

पुलिस की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि गरिमा ने लोन की जरूरत वाले लोगों को अपने संपर्क में लेना शुरू किया। उसका तरीका सीधा लेकिन भरोसा पैदा करने वाला बताया गया है, पहले वह कर्ज की समस्या का समाधान बताती, फिर नया पर्सनल लोन कराने के लिए तैयार करती और लोन की रकम अपने खाते में मंगवाती। कुछ मामलों में रकम का एक हिस्सा संबंधित व्यक्ति को देकर बाकी रकम अपने पास रखने का आरोप है। शुरुआत में किस्तों का भुगतान किए जाने से लोगों का भरोसा भी बना रहा। बाद में जब किस्तें बंद हुईं तो कर्ज का पूरा बोझ संबंधित व्यक्ति के सिर पर आ गया। बैंक की रिकवरी शुरू हुई और कई लोग भारी आर्थिक दबाव में आ गए।

पिता के संपर्कों से बढ़ता गया कथित नेटवर्क

इस कथित खेल में गरिमा अकेली नहीं थी। पुलिस ने खुलासा किया कि उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह भी इस नेटवर्क में शामिल थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिश्तेदारों और परिचितों से शुरुआत करने के बाद दायरा बढ़ता गया और पिता के संपर्कों के जरिए दूसरे लोगों तक पहुंच बनाई गई।

आरोप है कि गरिमा और उसके पिता ने रेलवे में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों, रिश्तेदारों और परिचितों को भी इस कथित नेटवर्क का शिकार बनाया। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में पीड़ितों को पुराने लोन से राहत दिलाने या होम लोन खत्म कराने का भरोसा दिया गया। पुलिस ने गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में कथित सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और अलग-अलग बैंक अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

डॉक्टर परमात्मा सिंह वाले मामले ने खोल दी पोल

गरिमा के नाम से जुड़ा सबसे गंभीर मामला पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. परमात्मा सिंह से संबंधित है। गरिमा सिंह ने डॉ. परमात्मा सिंह को पुराना होम लोन खत्म कराने के नाम पर अपने झांसे मे लिया। साथ ही उनके साथ करीब 1.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था। आरोप है कि गरिमा सिंह ने डॉक्टर को पुराने होम लोन से छुटकारा दिलाने का भरोसा दिया और उनके दस्तावेज हासिल कर लिए। इसके बाद फरवरी 2026 में महज दो दिनों के भीतर अलग-अलग छह बैंकों और वित्तीय संस्थानों से उनके नाम पर करीब 1.40 करोड़ रुपये का लोन कराया गया और रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई।

शिकायत के मुताबिक, बंधन बैंक से 24 लाख 50 हजार 139 रुपये, चोलामंडलम से 19 लाख 32 हजार 202 रुपये, SBI से 31 लाख 75 हजार रुपये, HDFC बैंक से 29 लाख 92 हजार 130 रुपये, ICICI बैंक से 24 लाख 88 हजार 201 रुपये और CFMS से 9 लाख 62 हजार 968 रुपये का लोन कराया गया। इस दौरान डॉक्टर को बताया गया कि उनका पुराना होम लोन खत्म कराने के लिए नया पर्सनल लोन लेना होगा और इसकी किस्तें भी गरिमा सिंह खुद भरेगी। आरोप है कि भरोसा दिलाने के लिए शुरुआत में दो से तीन महीने तक लोन की किस्तों का भुगतान किया गया। डॉक्टर के खाते में करीब 10 लाख रुपये भी छोड़े गए,जिन्हें कथित तौर पर उनका ‘प्रॉफिट’ बताया गया।

बैंक की रिकवरी कॉल से परेशान थे डॉक्टर

वहीं, बाद में जब EMI का भुगतान बंद हुआ तो बैंक की रिकवरी शुरू हो गई। मृतक की पत्नी डॉ. सुमित्रा सिंह ने बताया कि बैंक से लगातार रिकवरी के लिए फोन आ रहे थे। उन्होंने कहा कि परिवार इस बात को लेकर परेशान था कि इतनी बड़ी रकम की EMI कैसे चुकाई जाएगी। उन्होंने बताया कि डॉ. परमात्मा सिंह करीब सवा लाख रुपये की तनख्वाह पाते थे,जबकि लोन की EMI करीब तीन लाख रुपये तक पहुंच गई थी। पत्नी ने कहा कि केस दर्ज होने के बावजूद बैंक की रिकवरी का दबाव बना हुआ था और डॉक्टर लगातार परेशान रहते थे।

4अगस्त को दर्ज हुई थी FIR,आरोपी पिता-पुत्री पहले से जेल में

गोरखपुर के एसपी सिटी निमिष पाटिल के मुताबिक, 4 अगस्त 2026 को एम्स थाने में डॉ. परमात्मा सिंह की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी। उन्होंने गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह पर धोखाधड़ी और पैसे के गबन का आरोप लगाया था। मामले में गरिमा सिंह के अलावा मोहन सिंह, विशाल यादव, साधना मल्ल, श्रुति सिंह और संबंधित बैंक अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 351(3), 61(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई। जांच के बाद पुलिस ने गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था। ध्रुव नारायण सिंह सहजनवा रेलवे स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक के पद पर तैनात रह चुके हैं।गरिमा सिंह और उसके पिता पर रेलवे से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों, रिश्तेदारों और परिचितों समेत कई लोगों के साथ करोड़ों रुपये की कथित ठगी करने का आरोप है। पुलिस इस पूरे कथित नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

डॉक्टर की जेब से मिला कथित सुसाइड नोट

पुलिस के मुताबिक,डॉ. परमात्मा सिंह की जेब से एक पेज का कथित सुसाइड नोट मिला है। इसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए गरिमा सिंह को जिम्मेदार ठहराया है। एसपी सिटी निमिष पाटिल ने बताया कि 13 अगस्त को गोरखनाथ थाना क्षेत्र में सूचना मिली कि इस मामले के वादी डॉ. परमात्मा सिंह ने आठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मामले में गोरखनाथ थाने में सुसंगत धाराओं के तहत नया मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपी गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह पहले से ही जेल में बंद हैं।

पिता को गांव में मिली बेटे की तबीयत खराब होने की सूचना

वहीं, मृतक डॉक्टर के पिता पारस नाथ सिंह ने बताया कि घटना के समय वह गांव में थे। उन्हें पहले सूचना दी गई कि बेटे की तबीयत ज्यादा खराब है। जब वह गोरखपुर पहुंचे तो वहां पुलिस और लोगों की भीड़ देखकर उन्हें कुछ अनहोनी की आशंका हुई। उन्होंने बताया कि वह लगातार लोगों से घटना के बारे में पूछते रहे। काफी देर बाद उन्हें जानकारी मिली कि उनके बेटे ने अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी है।

गरिमा की डायरी ने खोली महत्वाकांक्षा की तस्वीर

इस मामले की जांच के दौरान बरामद की गई गरिमा की डायरी इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। डायरी में गरिमा ने अपने लिए बहुत बड़े टारगेट सेट कर रखे थे। एक जगह अप्रैल-मई 2026 तक 100 करोड़ रुपये कमाने और खुद को अरबपति बनाने का लक्ष्य लिखे होने की बात सामने आई है। यही डायरी अब पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है, क्योंकि इससे कथित तौर पर उसकी आर्थिक महत्वाकांक्षा और कर्ज के बढ़ते दबाव के बीच का अंतर सामने आता है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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