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अभिषेक बनर्जी पर 'हमले' के बाद अस्पताल पहुंचे सिर्फ 2 विधायक; बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में क्या दिखने लगी फूट?

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में हार के बाद TMC में आंतरिक युद्ध साफ तौर पर दिखने लगा है। सोनारपुर में भीड़ के हमले में घायल हुए अभिषेक बनर्जी को देखने अस्पताल में 80 में से सिर्फ 2 विधायक पहुंचे।

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फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं अभिषेक (PTI)

Photo : PTI

Kolkata: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) गहरे सांगठनिक संकट और आंतरिक युद्ध में फंस गई है। शनिवार को दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने पहुंचे TMC के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी पर स्थानीय जनता, विशेषकर महिलाओं ने हमला कर दिया। इस दौरान उन पर पत्थर और अंडे फेंके गए, उन्हें थप्पड़ मारने और लात मारने की कोशिश भी की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

लेकिन, इस घटना से भी बड़ा झटका तब लगा जब हमले में घायल अभिषेक बनर्जी को कोलकाता के अस्पताल में भर्ती कराया गया। टीएमसी के कुल 80 निर्वाचित विधायकों में से महज दो विधायक, कुणाल घोष और कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ही उनका हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे। 80 में से 78 विधायकों का अस्पताल न पहुंचना यह साफ बयां करता है कि TMC के भीतर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक मौन विद्रोह शुरू हो चुका है।

ममता बनर्जी देर रात तक रहीं साथ

अस्पताल में विधायकों की इस भारी बेरुखी के बीच खुद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी पूरे समय अभिषेक बनर्जी के साथ अस्पताल में डटी रहीं। उनके साथ सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और शोभन चटर्जी जैसे गिने-चुने सीनियर नेता ही नजर आए। ममता बनर्जी ने डॉक्टरों से अपडेट लिया और आखिरकार खुद अभिषेक को अपनी निगरानी में उनके आवास पर वापस भेजकर ही आधी रात करीब 12 बजे अपने कालीघाट स्थित आवास के लिए रवाना हुईं।

कॉर्पोरेट कल्चर और IPAC पर फूट रहा गुस्सा: अभिषेक निशाने पर

दरअसल पिछले कुछ समय में बंगाल चुनाव 2026 में मिली हार का ठीकरा अब TMC के दिग्गज और पुराने नेता खुलेआम राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के सिर फोड़ रहे हैं। बीते दिनों पूर्व छात्र नेता कोहिनूर मजूमदार और कूचबिहार के कद्दावर नेता रवींद्रनाथ घोष जैसे वरिष्ठ नेताओं ने अभिषेक बनर्जी पर सत्ता के केंद्रीकरण का आरोप लगाया है। सीनियर नेताओं का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी ने पार्टी में एक "कॉर्पोरेट संस्कृति" को लागू किया और जमीनी नेताओं को दरकिनार कर निजी राजनीतिक सलाहकार फर्म IPAC पर आंख मूंदकर भरोसा किया।

दरार की गवाह बनीं दो बड़ी घटनाएं

अभिषेक बनर्जी के प्रति विधायकों की यह बेरुखी अचानक नहीं है, बल्कि इसके संकेत पिछले कुछ दिनों से लगातार मिल रहे हैं। चुनाव के बाद नवनिर्मित सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'बुल्डोजर कल्चर' और हॉकर बेदखली अभियान के खिलाफ TMC ने विधानसभा परिसर में अंबेडकर प्रतिमा के पास एक बड़े धरने का आयोजन किया था। लेकिन, पार्टी के 80 विधायकों में से केवल 36 विधायक ही इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए, जिसने पार्टी के भीतर दरार को सार्वजनिक कर दिया था।

आंतरिक संघर्ष केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है। राज्यभर में TMC के नियंत्रण वाली नगरपालिकाओं में बगावत हो चुकी है और अब तक 100 से अधिक TMC पार्षदों ने इस्तीफे दे दिए हैं।

सोनारपुर की सड़कों पर अभिषेक बनर्जी को 'चोर' कहकर अंडे मारना और दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के 78 विधायकों का उनसे दूरी बना लेना, यह संकेत दे रहा है कि ममता बनर्जी के लिए अब अपनी पार्टी को बिखरने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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