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Vidisha News: पूर्व CM शिवराज सिंह चौहान का देशी अंदाज, खेतों में दौड़ाते दिखे ट्रैक्टर

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने खेत पर ट्रैक्टर चलाते नजर आए। उन्होंने फुरसत के पलों में अपने खेतों में चने की बुआई की।

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पूर्व CM शिवराज का देशी अंदाज

विदिशा: मध्य प्रदेश को नया मुख्यमंत्री मोहन यादव के रूप में मिलने के बाद पूर्व सीएम शिवराज सिंह फुरसत के पलों को जी रहे हैं। गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह विदिशा में अपने खेत में ट्रैक्टर चलाते नजर आए। उन्होंने, करीब एक घंटे खेत तक खेतों में चने की बुआई की। शिवराज सिंह दोपहर में अपने विदिशा स्थित फॉर्म हाउस पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने खुद ट्रैक्टर की स्टीयरिंग संभाली और चने की बुआई करने लगे। उनके इस नए अवतार को देखकर सभी चकित रह गए। शिवराज ने इससे जुड़ा एक ट्विट भी किया है।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह का विदिशा में फार्म हाउस है, जहां वो अक्सर फुरसत के पलों में समय बिताने के लिए पहुंचते हैं। करीब चार साल के बाद मुख्यमंत्री पद से मुक्त होने के बाद किसानों के बीच पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को पूर्व सीएम अपने फार्म हाउस के खेतों में किसान के कलेवर में नजर आए, वो खुद ट्रैक्टर चलाते पाए गए। उन्होंने, खेतों में रबी की फसल चने की बुआई की। सामने आई तस्वीरों में पूर्व सीएम ट्रैक्टर की स्टीयरिंग में बैठे हैं और उनके अगल-बगल दो लोग बैठे हुए हैं, जो उन्हें बुआई की विधि बता रहे हैं। करीब एक घंटे तक सीएम खेत पर पसीना बहाते नजर आए।

पूर्व CM शिवराज का देशी अंदाज

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पूर्व सीएम शिवराज ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) में लिखा कि 'अपने मध्य प्रदेश की माटी सोना उगलती है...धरती माँ धन-धान्य से घरों को खुशहाल बना देती हैं। पसीने की कुछ बूँदों से माटी को नमन किया। आज खेतों की जुताई कर चने की बुआई की।

पूर्व CM शिवराज का देशी अंदाज

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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