Swarved Mahamandir Varanasi: वाराणसी के बना स्वर्वेद महामंदिर दुनिया का सबसे अनोखा आध्यात्मिक केंद्र है। इस महामंदिर की ऊंचाई तकरीबन 182 फीट है और यह 80 हजार वर्गफीट क्षेत्र में फैला हुआ है। महामंदिर की सबसे खास बात ये है कि, यहां की दीवारें मकराना संगमरमर की हैं और इन दीवारों पर स्वर्वेद के चार हजार दोहे, वेदों के मंत्र और संतों की वाणियों को उकेरा गया है। इस महामंदिर के कुल सात तल हैं जिनमें सद्गुरुदेव की मूर्तियां बनी हुई हैं। महामंदिर का ढाई लाख वर्गफीट में फैला हुआ फर्श श्वेत संगमरमर का है। वाराणसी में बना ये मंदिर देखने में अयोध्या के निर्माणाधीन राम मंदिर की तरह ही भव्य है। यहां पर भारतीय संस्कृति को काफी शानदार ढंग से प्रस्तुत कियस गया है। वहीं, दर्शन करने के लिए आने वाले लोगों की सुविधा के लिए दो कैप्सूल लिफ्ट सहित चार लिफ्ट भी लगाई गई हैं।
19 साल का समय, 600 कारीगर
वाराणसी के इस मंदिर को बनाने में 600 कारीगर, 200 मजदूर और 15 इंजीनियरों को 19 साल का समय लगा। मंदिर के पहले तल का निर्माण होने के बाद आम लोगों के लिए इसे खोल दिया गया है, लेकिन कुछ काम बाकी अगले दो साल तक पूरा होने की उम्मीद है। दुनिया के इस अनोखे मंदिर में देवी और देवता की प्रतिमा नहीं है। इस जगह को ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए योग साधना करने के उद्देश्य से बनाया गया है। 100 करोड़ की लागत से तैयार इस मंदिर का काम दिसंबर 2004 में शुरू हुआ था। यहां पर मई 2017 में 21 हजार कुंडीय स्वर्वेद उत्तरार्द्ध ज्ञान महायज्ञ हुआ था। तत्कालीन समय में हुए इस यज्ञ को इतिहास के सबसे विशालतम यज्ञ के तौर पर भी पहचान मिली थी।
दीवारों की नक्काशी देख गदगद हो जाएंगे
स्वर्वेद महामंदिर गुरु परंपरा को समर्पित है और इसे योग साधकों की साधना के लिए बनाया गया है। मंदिर के पहले फ्लोर पर स्वर्वेद प्रथम मंडल के दोहे उकेरे गए हैं। बाह्य दीवारें वेद, उपनिषद, गीता, महाभारत, रामायण पर आधारित 28 प्रसंगों से सुसज्जित हैं। पहले से लेकर पांचवें तल तक आपको दीवारों पर वेदों और धर्मग्रंथों के दोहों की शानदार कलाकृतियां देखने को मिलेंगी। इसके बाद सातवें तल पर दो अत्याधुनिक प्रेक्षागृह बनाए गए हैं। जिनमें विहंगम योग के सैद्धांतिक व क्रियात्मक बोध का ज्ञान साधकों को प्राप्त हो सकेगा। यहां की एक खास बात ये भी है कि, मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा परिपथ और फव्वारे लगे हैं। जिनके बाहर गुलाबी सैंड स्टोन से हाथी, हिरन की सुंदर प्रतिकृतियां बनाई गई हैं।
महामंदिर का शिखर भी है खास
स्वर्वेद महामंदिर के नौ शिखर भी बेहद खास हैं, जो कि गुजरात में जीआरसी तकनीक से बनाए गए हैं। हालांकि मुख्य शिखर 125 पंखुड़ियों के विशालकाय कमल पुष्प की आकृति के ही हैं। इस मंदिर के तीन लाख घनफीट सुंदर गुलाबी सैंडस्टोन पर नक्काशीदार कलाकृतियां भी बनी हैं, जिनके माध्यम से दर्शनार्थियों को आध्यात्मिक संदेश दिए गए हैं। इन गुलाबी सैंडस्टोन को राजस्थान के बंसीपहाड़पुर से मंगाया गया है। मंदिर के बाहरी भाग में 132 ऋषियों-ऋषिकाओं की मूर्तियां बनी हैं जो कि इसे और खूबसूरत बनाती हैं। गौरतलब है कि, महामंदिर के प्रांगण में एक उद्यान बना हुआ है जिसके निर्माण में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी कई अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल हुआ है।
