Varanasi News: बनारस की राजनीति में गुरुवार की शाम कुछ अलग थी। शहर के लहुराबीर की मशहूर अड़ी चर्चा में रही, जब गमछा विवाद को लेकर सुर्खियों में आए मंत्री रविन्द्र जायसवाल और विधायक नीलकंठ तिवारी साथ नजर आए। दोनों ने एक ही बेंच पर बैठकर चाय पी और रिश्तों में मिठास घोलने की कोशिश की। यह मुलाकात वाराणसी की सियासत में भरत मिलाप जैसा दृश्य पेश करती दिखी।
सीएम के सामने फेंका था गमछा
दरअसल, कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी दौरे पर थे। सरोजा पैलेस में आयोजित स्वच्छता सम्मान कार्यक्रम के दौरान मंच पर एक अजीब वाकया हो गया। स्वागत के दौरान मंत्री और विधायक के बीच गमछा देने को लेकर हल्की नोकझोंक हुई और दोनों एक-दूसरे की ओर गमछा फेंकते नजर आए।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हंगामा मच गया। विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी ने इसे बीजेपी के भीतर गुटबाजी का उदाहरण बताया।
डैमेज कंट्रोल में जुटे नेता
पार्टी की किरकिरी होते देख दोनों नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए। माहौल शांत करने और यह संदेश देने के लिए कि सब ठीक है, गुरुवार को लहुराबीर में दोनों ने साथ चाय पी। न केवल चाय पर चर्चा हुई, बल्कि फोटो सेशन भी हुआ ताकि तस्वीरों के जरिए यह मैसेज साफ पहुंचे कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है।
विपक्षियों ने फैलाया दुष्प्रचार
विधायक और राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी ने कहा कि “विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। इसलिए हमारे आपसी सौहार्द को तकरार की तरह दिखाने का प्रयास किया गया। बीजेपी में सभी कार्यकर्ता और नेता एक परिवार की तरह हैं।” वाराणसी की इस “चाय डिप्लोमेसी” ने यह साफ कर दिया कि पार्टी के अंदरूनी मतभेदों की खबरें अब थमने लगी हैं। गमछे से शुरू हुई सियासी गर्माहट अब चाय की प्याली से ठंडी हो गई है।
