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Varanasi: दालमंडी में चला बुलडोजर; काशी विश्वनाथ धाम के लिए बनेगा तीसरा 'मॉडल रोड', जानें पूरा प्रोजेक्ट

वाराणसी के दालमंडी में मॉडल रोड प्रोजेक्ट के तहत ध्वस्तीकरण चल रहा है। 220 करोड़ की लागत से बनने वाला यह मार्ग काशी विश्वनाथ धाम के लिए तीसरा प्रमुख रास्ता होगा। जानें क्या है ये प्रोजेक्ट।

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योगी सरकार का दालमंडी प्रोजेक्ट

Photo : ANI

Varanasi News: काशी में बुनियादी ढांचे को नया रूप देने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। वाराणसी के प्रसिद्ध व्यावसायिक क्षेत्र दालमंडी में आज भारी पुलिस सुरक्षा के बीच ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद प्रशासन ने इस 'मॉडल रोड प्रोजेक्ट' में तेजी ला दी है, जिससे आने वाले समय में काशी विश्वनाथ मंदिर की राह और भी आसान हो जाएगी।

दोपहर 12 बजे से शुरू हुई कार्रवाई

पीडब्ल्यूडी (PWD) के अधिकारियों ने गुरुवार रात से ही इलाके में मुनादी शुरू कर दी थी, जिसके बाद आज दोपहर 12 बजे से बुलडोजर चलने लगे। प्रशासन ने दुकानदारों और मकान मालिकों को दोपहर तक का समय सामान निकालने के लिए दिया था। पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता के.के. सिंह के अनुसार, आज का लक्ष्य उन 45 चिन्हित इमारतों को ध्वस्त करना है जो अपंजीकृत या जर्जर अवस्था में हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

दालमंडी की तंग गलियों में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। मौके पर अर्धसैनिक बल, पीएसी (PAC) और नागरिक पुलिस सहित करीब 300 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पूरे क्षेत्र की ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है और यातायात को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, एडीएम सिटी और एसीपी की टीमें मौके पर डटी हुई हैं।

क्या है दालमंडी मॉडल रोड प्रोजेक्ट?

सरकार दालमंडी को काशी के एक अत्याधुनिक 'मॉडल रोड' के रूप में विकसित कर रही है। इस प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं। यह सड़क 650 मीटर लंबी और 17.5 मीटर चौड़ी होगी, जिसके दोनों तरफ 15-15 फीट का फुटपाथ होगा। पर्यटकों के बैठने के लिए कुर्सियां और लाइटिंग का विशेष इंतजाम होगा। बिजली, पानी और नाली की लाइनों को पूरी तरह अंडरग्राउंड रखा जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट की लागत 220 करोड़ है। इस मार्ग के बनने से 181 मकान और लगभग 500 दुकानें प्रभावित होंगी। सरकार ने मुआवजे के लिए ₹194 करोड़ का बजट रखा है, जिसमें से अब तक 120 लोगों को भुगतान किया जा चुका है।

प्रोजेक्ट का महत्व और समय सीमा

वर्तमान में काशी विश्वनाथ मंदिर जाने के लिए दो मुख्य रास्ते (मैदागिन और गोदौलिया) हैं। दालमंडी मार्ग तीसरा और सबसे चौड़ा रास्ता बनेगा, जिससे मंदिर की दूरी मात्र 150 मीटर रह जाएगी। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से बनारस के हथकरघा उद्योग, लकड़ी के खिलौने और प्रसिद्ध बनारसी मिल्क साड़ी इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, मार्ग के किनारे होटल और होम-स्टे विकसित किए जाएंगे, जिससे पर्यटन में वृद्धि होगी। प्रशासन ने 28 फरवरी 2026 तक भूमि खाली करने और जून 2026 तक प्रोजेक्ट को हैंडओवर करने की समय सीमा तय की है।

चंदौली में सपा कार्यालय पर चला बुलडोजर

वहीं चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत प्रशासन ने बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई की। इस दौरान सैकड़ों दुकानों और मकानों को तोड़ा गया, लेकिन सबसे अधिक चर्चा समाजवादी पार्टी (सपा) के दफ्तर को गिराए जाने को लेकर रही। योगी सरकार की इस कार्रवाई में चंद मिनटों में ही सपा कार्यालय मलबे में तब्दील हो गया। पूर्व सांसद राम किशुन यादव की अगुवाई में सपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और हंगामा करने लगे। उन्होंने पीडब्ल्यूडी दफ्तर में धरना दिया और नारेबाजी की, हालांकि देर रात जिलाधिकारी की अपील के बाद धरना समाप्त हुआ। सपा कार्यकर्ताओं ने टाइम्स नाउ नवभारत से बात करते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई है। राम किशुन यादव ने कहा कि भाजपा सरकार जानबूझकर सपा कार्यालय को निशाना बना रही है, जबकि पीडब्ल्यूडी ने वर्ष 2003 में इस जमीन को सपा को लीज पर दिया था और किराया भी नियमित रूप से जमा किया जाता रहा है। बुलडोजर की कार्रवाई के बाद सपा का दफ्तर खंडहर में बदल गया, जहां कार्यकर्ता मलबे के बीच पार्टी के झंडे, टोपी और अखिलेश यादव की ओर से जारी बुकलेट को सहेजते दिखे।

दरअसल, पड़ाव क्षेत्र से गोधना मोड़ तक 11.5 किलोमीटर लंबी सड़क को फोरलेन बनाने की योजना पर काम चल रहा है। 325 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत लगभग 450 भवनों को हटाया जाना है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित दुकानदारों और मकान मालिकों को पहले ही बैठक और नोटिस के माध्यम से जानकारी दी गई थी, साथ ही मुनादी भी कराई गई थी। इस कार्रवाई ने जहां विकास परियोजना को आगे बढ़ाया है, वहीं राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन को भी जन्म दिया है

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