बिहार के लड़के वैभव सूर्यवंशी ने IPL में पिछले साल भी खूब झंडे गाड़े थे। कल यानी सोमवार को हुए IPL 2026 के अपने पहले मुकाबले में भी सूर्यवंशी ने अपने टैलेंट का वैभव खूब बिखेरा। उन्होंने पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए सिर्फ 15 गेंदों में अर्द्धशतक लगाकर अपने आलोचकों के मुंह बंद कर दिए। वैभव अपनी शानदार बैटिंग से अपने राज्य बिहार और जिले समस्तीपुर का नाम खूब ऊंचा कर रहे हैं। चलिए जानते हैं उनके गृह जिले समस्तीपुर की पांच खास बातें -
कैसे मिला समस्तीपुर नाम
समस्तीपुर की जिला वेबसाइट के अनुसार बंगाल के हाजी इलियास ने जब तिरहुत को दो हिस्सों में बांट दिया तो तत्कालान ओनवारा राजा अपनी राजधानी मधुबनी के पास सुगौना ले गए। जिले का दक्षिणी हिस्सा हाजी इलियास के शासन में चला गया और उत्तरी भाग ओनवारा के शासन में रहा। समस्तीपुर के आधुनिक हिस्से को बंगाल के हाजी शमसुद्दीन इलियास ने स्थापित किया था। इस हिस्से का मूल नाम शमशुद्दीनपुर रखा गया था, जो बाद में समस्तीपुर कहलाने लगा। साल 1972 में समस्तीपुर को दरभंगा जिले से अलग कर एक अलग जिला बनाया गया।
समस्तीपुर, बिहार का काफी महत्वपूर्ण और एतिहासिक भूमि है। यह कृषि प्रधान जिला है। इस जिले को मिथिला का प्रवेशद्वार भी कहा जाता है। बूढ़ी गंडक नदी के तट पर बसे इस जिले की भूमि काफी उपजाऊ मानी जाती है, जहां पर आम और लीची की खेती होती है। यहां पर विद्यापतिनगर जैसे आध्यात्मिक स्थल भी हैं। यही विद्यापतिनगर महान मैथिल कवि विद्यापति की कर्मभूमि और समाधि स्थल भी है।
रेलवे डिवीजन है समस्तीपुर
समस्तीपुर जंक्शन, पूर्व-मध्य रेलवे का एक प्रमुख रेलवे डिवीजन है। यह उत्तर बिहार को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है।
पेड़ा मिठाई के लिए मशहूर समस्तीपुर
समस्तीपुर को अपनी स्वादिष्ट पेड़ा मिठाई के लिए भी जाना जाता है। यहां का पेड़ा देश ही नहीं इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों तक में प्रसिद्ध है। यहां के पेड़े अपनी शुद्धता के लिए पहचाने जाते हैं।
कृषि उत्पादन के लिए मशहूर
समस्तीपुर को अपने आम, लीची, मक्का और आलू उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। यही नहीं, यहां की रामेश्वर जूट मिल भी काफी प्रसिद्ध है। पूसा में मौजूद डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के लिए भी समस्तीपुर का विशेष महत्व है।
सांस्कृतिक विरासत के लिए मशहूर समस्तीपुर
समस्तीपुर को मिथिलांचल का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह क्षेत्र मिथिला चित्रकला, लोकगीत और काठघोरवा नाच जैसी परंपराओं के लिए जाना जाता है।
सांपों का अनोखा मेला
समस्तीपुर में हर साल नाग पंचमी के अवसर पर एक अनोखा मेला भी लगता है। यहां लगने वाला सांपों का मेला 300 साल पुराना है। श्रद्धालु यहां नदी से सांप निकालकर उन्हें अपनी मन्नत के अनुसार अपने गले, कंधे या हाथों में लेकर घूमते हैं।
