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हर्षिल वैली के धराली में बादल फटने से आई तबाही के बाद से अब तक क्या कुछ हुआ, Videos में देखें पूरा घटनाक्रम

Uttarkashi Cloud Burst Videos: उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले की हर्षिल वैली में मंगलवार दोपहर को बादल फटने के बाद धराली में हर तरफ तबाही मच गई। पहाड़ों से पानी के साथ आए मलबे ने छोटे से कस्बे को अपनी चपेट में लिया और देखते ही देखते एक बड़े हिस्से को निगल गया। वीडियो में देखें फ्लैश फ्लड के पहले वीडियो से लेकर अब तक के सभी अपडेट।

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उत्तरकाशी के धराली में हर तरफ तबाही के मंजर (फोटो - PTI)

Photo : PTI

Uttarkashi Cloud Burst Videos: कल यानी मंगलवार दोपहर को घड़ी में 1.55 बजे थे। पहाड़ों में झमाझम बारिश का दौर जारी था। इसी बीच उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले की हर्षिल वैली में अचानक बादल फट गया। जोर की गर्जना के साथ खीरगाड़ के कैचमेंट एरिया से भारी मात्रा में पानी के साथ मलबा और बड़े-बड़े पत्थर बहने लगे। सैलाब ऐसा था कि रास्ते में जो आया उसे मिट्टी में मिला दिया। देखते ही देखते सैलाब यहां के धराली कस्बे तक पहुंच गया और फिर पलक झपकते ही यहां ऐसी तबाही मचाई कि जिसने भी देखा वह दंग रह गया

धराली के सामने भागीरथी नदी की दूसरी ओर मुखबा के लोगों ने यह मंजर अपनी आंखों से देखा और फोन के कैमरा में कैद किया। उन्होंने मंगलवार की दोपहर जो देखा उस मंजर को शायद ही वह लोग कभी भुला पाएंगे। उनके कैमरे से जो कुछ रिकॉर्ड हुआ, वह तमाम टीवी चैनलों के जरिए दुनिया तक पहुंचा और तबाही का ऐसा मंजर देखकर हर कोई हतप्रभ रह गया। पहाड़ी इलाके से खबर पहुंचने में करीब आधे घंटे का समय लगा और देखते ही देखते तबाही को बयां करते मुखबा के लोगों के शूट किए हुए वीडियो हर तरफ टीवी स्क्रीन पर नजर आने लगे। बादल फटने के बाद आए फ्लैश फ्लड से लेकर अब तक क्या कुछ हुआ और अब वहां के हालात कैसे हैं, चलिए जानते हैं।

वो पहली और डरावनी तस्वीरें

मुखबा के स्थानीय निवासियों ने फ्लैश-फ्लड का ये वीडियो शूट किया था, जिसमें वह चीखते-चिल्लाते सुनाई दे रहे हैं। वह धराली में मौजूद अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित भी हैं और जोर-जोर से आवाज देकर लोगों को वहां से भागने के लिए भी कह रहे हैं। इस फ्लैश फ्लड ने कितनी तबाही मचाई यह तो आप नीचे दिए गए इस वीडियो में ही देख सकते हैं।

रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण

बादल फटने और उसके बाद आए फ्लैश फ्लड से धराली में भारी नुकसान की खबर जंगल की आग की तरह फैली। आनन-फानन में वहां राहत और बचाव कार्य के लिए पुलिस और सेना को लगाया गया। भटवाड़ी से NDRF और SDRF की टीम को भी भेजा गया और प्रशासन ने ऋषिकेश से भी तुरंत मदद पहुंचाई। धराली में अब भी रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन NDRF के DIG का कहना है कि यहां पर रेस्क्यू अभियान चलाना भी काफी चुनौतीपूर्ण है।

विशेषज्ञों की क्या है राय

धराली में बादल फटने पर विशेषज्ञों ने बताया कि जब कहीं पर सिर्फ 1 घंटे में 100 मिलीमीटर या उससे ज्यादा बारिश होती है तो उसे बादल फटना कहा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बादल फटना एक प्राकृतिक घटना है। लेकिन जिस तरह से पहाड़ी इलाकों में निर्माण हो रहा है, पर्यटन बढ़ रहा है और असुरक्षित स्थानों पर होटल बन रहे हैं, बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें बन रही हैं, ये सब कारण बादल फटने के बाद होने वाले नुकसान को कई गुना बढ़ा रहे हैं।

तबाही के बीच चमत्कार

धराली में बादल फटने के बाद आए फ्लैश फ्लड ने जब हर तरफ तबाही मचा दी, तब वहां एक चमत्कार भी दिखा। यहां मलबे के बीच से एक व्यक्ति किसी तरह बचकर निकलता हुआ दिखा। इधर मोबाइल से वीडियो बना रहे लोग लगातार चिल्ला रहे थे भाग-भाग... इस बीच कोई कहता है, बच गया... जो तबाही के बीच राहत की सांस देता है।

तबाही के दूसरे दिन कैसे हैं हालात

धराली में 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अब तक सैकड़ों लोगों के गायब होने की भी सूचना है। उत्तरकाशी के भटवाड़ी में भी बादल फटने से सड़कें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं, लगातार मलबा गिर रहा है।

उत्तराखंड में आज हरिद्वार, नैनीताल और उधमसिंह नगर सहित कई जिलों और इलाकों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। कल रात से ही अल्मोड़ा जिले के कई इलाकों में भी लगातार 10-12 घंटे से बारिश हो रही है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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