उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी और व्यावसायिक परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए जारी सख्ती के बीच प्रयागराज से एक बड़ा मामला सामने आया है। यूपी एसटीएफ (विशेष कार्य बल) की प्रयागराज इकाई ने नैनी स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में चल रही अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा में फर्जीवाड़ा पकड़ा है। एसटीएफ ने कंप्यूटर आधारित (CBT) परीक्षा में परीक्षार्थियों से पैसे लेकर उनके स्थान पर 'सॉल्वर' बैठाकर सामूहिक नकल कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए संस्थान के प्रधानाचार्य समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।
पकड़े गए आरोपियों में आईटीआई के प्रधानाचार्य अशोक कुमार के अलावा पांच सॉल्वर-शिवम कुमार, रणविजय सिंह, जय सिंह, जितेंद्र पटेल और दिलीप कुमार शामिल हैं। इनके साथ ही परीक्षा प्रभारी बनाए गए रवि प्रकाश और संस्थान के चार अनुदेशकों (फूल प्रकाश, धीरज कुमार, राजेश कुमार व राजकुमार मौर्य) को भी एसटीएफ ने अपनी हिरासत में लिया है।
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कार्रवाई के दौरान एसटीएफ की टीम ने परीक्षा केंद्र से 5.10 लाख रुपये नकद, 5 प्रवेश पत्रों की छायाप्रति, 5 मॉनिटर, 5 सीपीयू, 5 कीबोर्ड, 5 माउस, 6 एंड्रॉइड मोबाइल फोन और परीक्षा से जुड़े कई अहम कागजात जब्त किए हैं। एसटीएफ अधिकारी ने बताया कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी कि 11 जुलाई से 8 अगस्त तक चलने वाली इस परीक्षा में प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी पैसे लेकर सामूहिक नकल करा रहे हैं। योजना के तहत कमजोर परीक्षार्थियों से मोटी रकम ली जाती थी और उन्हें अलग कमरे में बैठाकर उनकी जगह फर्जी परीक्षार्थी (सॉल्वर) से पेपर हल कराया जा रहा था।
सूचना की पुष्टि होने पर एसटीएफ की टीम ने बुधवार को परीक्षा केंद्र पर अचानक छापेमारी की, जहाँ मूल अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठकर परीक्षा दे रहे थे। पूछताछ में परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश ने कुबूल किया कि यह पूरा खेल प्रधानाचार्य की शह पर चल रहा था। फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ नैनी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और उप्र सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के तहत केस दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
