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पेठा से लेकर पेड़ा तक...UP की ‘One District One Cuisine’ फूड लिस्ट में ये व्यंजन; लखनवी कबाब-बिरयानी साइड लाइन!

‘One District One Cuisine’ उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी 'एक जिला एक व्यंजन' (ODOC) पहल के तहत जिलेवार पारंपरिक खाद्य पदार्थों की सूची तैयार की है, जिसका उद्देश्य बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार पहुंच के माध्यम से स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देना है। इसमें ख्याति प्राप्त कई प्रतिष्ठित मांसाहारी व्यंजन ओडीओसी सूची में शामिल नहीं हैं।

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यूपी की ’एक जिला, एक व्यंजन’ लिस्ट आई सामने (फोटो-AI)

One District One Cuisine’ : उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी ’एक जिला, एक व्यंजन’ पहल के तहत पारंपरिक खाने की चीजों की जिला-वार सूची जारी की। इस सूची में राज्य के विभिन्न जिलों से जुड़े तमाम मशहूर मांसाहारी व्यंजनों को जगह नहीं मिली। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, इस सूची को जारी करने का मकसद बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार तक आसान पहुंच के जरिए स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देना है। अधिकारियों ने बताया कि जिन व्यंजनों को सूची में जगह नहीं मिली उनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर व्यंजन शामिल हैं, जिनमें लखनऊ के मशहूर टुंडे के गलावटी कबाब, अवधी बिरयानी एवं निहारी तथा रामपुर के शाही रामपुरी व्यंजन जैसे मटन कोरमा व सीक कबाब और बरेली के मशहूर मटन व्यंजन शामिल हैं।

अधिकारियों का दावा है कि ’एक जिला, एक व्यंजन’ पहल के तहत तैयार की गयी फेहरिस्त में हर जिले को उसके खास व्यंजनों के साथ जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि इस सूची में आगरा के पेठे व दालमोठ, फिरोजाबाद के आलू से बने व्यंजनों, मैनपुरी की सोन पापड़ी व उबले आलू के व्यंजन, मथुरा के पेड़े शामिल हैं।

अयोध्या की कचौरी को मिली जगह

अयोध्या की कचौरी, पेड़ा और कुल्हड़ दही-जलेबी, सुल्तानपुर के पेड़ा और नमकीन आइटम, बाराबंकी की चंद्रकला, और अमेठी के समोसा और गुड़ आधारित मिठाइयां सूचीबद्ध की गई हैं। अम्बेडकर नगर बताशा और खोया आधारित वस्तुओं के लिए जाना जाता है।

आज़मगढ़ तहेरी और गाजर के हलवे के लिए, बलिया सत्तू-आधारित व्यंजनों के लिए और मऊ लिट्टी-चोखा के लिए जाना जाता है। वाराणसी के विविध प्रसादों में तिरंगा बर्फी, ठंडाई, लस्सी, कचौरी और बनारसी पान शामिल हैं, जबकि जौनपुर इमरती और अपनी अनूठी मिठाइयों के लिए जाना जाता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इन व्यंजनों को मिली जगह

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, मेरठ की रेवड़ी और गजक, गाजियाबाद की पापड़-आधारित तैयारी, गौतम बौद्ध नगर के बेकरी उत्पाद, हापुड़ के पापड़, और बुलंदशहर की कचौरी और पेड़ा को शामिल किया गया है। बागपत का संबंध बालूशाही और घेवर से है।

सूची में अलीगढ़ को डेयरी उत्पाद व कचौड़ी, हाथरस के हींग से बने व्यंजन, कासगंज के मूंग दाल का हलवा व सिंघाड़े के आटे से बने नमकीन भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, अयोध्या की कचौड़ी, पेड़ा व कुल्हड़ दही-जलेबी, सुल्तानपुर के पेड़े व नमकीन व्यंजन, बाराबंकी की चंद्रकला और अमेठी के समोसे व गुड़ से बनी मिठाइयों को सूची में शामिल किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मकसद राज्य के सभी जिलों में स्थानीय व्यंजनों को व्यवस्थित तरीके से सूचीबद्ध करना और उन्हें बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने मंगलवार को ’एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश आधुनिक ब्रांडिंग और बेहतर पैकेजिंग के जरिए अपने पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए तैयार है।

उन्होंने पोस्ट में कहा, "यह कदम स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाएगा, साथ ही रोजगार और उद्यमिता को भी बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में, उत्तर प्रदेश स्वाद, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में एक नई पहचान बना रहा है।

क्यूज़ीन सोसाइटी ऑफ इंडिया ने उठाए सवाल

इधर, क्यूज़ीन सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और प्रसिद्ध फूड हिस्टोरियन पुष्पेश पंत ने इस पहल को हाफ बेक्ड' करार देते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह कदम पक्षपातपूर्ण नजर आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शाकाहारी व्यंजनों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन चयन में भेदभाव नहीं होना चाहिए।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमार author

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ... और देखें

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