UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों 'निषाद' वोट बैंक को साधने की होड़ मची हुई है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में निषाद राजनीति का नया अखाड़ा तैयार हो गया है। बिहार की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी की लखनऊ एंट्री ने भाजपा गठबंधन में शामिल संजय निषाद की टेंशन बढ़ा दी है।
मुकेश सहनी की लखनऊ में हुंकार
बिहार के पूर्व मंत्री और VIP पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी आज लखनऊ में एक बड़ी रैली और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं। तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले सहनी इस बार सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर निशाना साधेंगे। VIP का आरोप है कि 2022 के चुनाव से पहले निषादों को अनुसूचित जाति में शामिल करने और आरक्षण देने का जो वादा किया गया था, वह अब तक अधूरा है। सूत्रों की मानें तो मुकेश सहनी इस बार यूपी में इंडी गठबंधन (INDIA) के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं।
संजय निषाद बनाम मुकेश सहनी: 'पॉलिटिकल गॉडफादर' की जंग
निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने मुकेश सहनी की एंट्री पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने खुद को निषाद समाज का असली “पॉलिटिकल गॉडफादर” बताते हुए कहा कि समाज का भला केवल उनकी पार्टी ही कर सकती है। संजय निषाद का दावा है कि बाहरी नेता यूपी की जमीन पर कोई खास असर नहीं डाल पाएंगे। फिलहाल निषाद पार्टी पश्चिमी यूपी में अपनी पैठ मजबूत करने में जुटी है ताकि भाजपा के साथ गठबंधन में अपनी मोलभाव की शक्ति बढ़ा सके।
समाजवादी पार्टी का बड़ा दांव
मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी निषाद-कश्यप वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए अपनी रणनीति बदल दी है। सपा ने फूलन देवी की बहन रुक्मणि निषाद को महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया है। अखिलेश यादव की पार्टी लगातार कश्यप-निषाद सम्मेलन कर रही है और जल्द ही एक बड़ी रैली के जरिए इस वर्ग को अपने पाले में करने की योजना बना रही है।
80 सीटों पर निर्णायक भूमिका
उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समाज का वोट बैंक लगभग 4.5% से 9% के बीच माना जाता है। राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 70 से 80 सीटें ऐसी हैं, जहाँ निषाद मतदाता हार-जीत तय करते हैं। खासकर पूर्वी और पश्चिमी यूपी की नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों में इनका खासा प्रभाव है। यही कारण है कि भाजपा भी डिप्टी सीएम केशव मौर्य और नरेंद्र कश्यप जैसे नेताओं के जरिए इस वर्ग को जोड़ने के लिए महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों की रूपरेखा तैयार कर रही है।
