UP News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से बीते दिनों एक इंसानियत को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया था। यहां के तितवी थाना क्षेत्र के मंडी गांव में एक पेपर प्लेट बनाने वाली फैक्ट्री में पिछले करीब डेढ़ साल से 12 मजदूरों को बंधक बनाकर उनके साथ क्रूर बर्बरता की जा रही थी। अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
पिटबुल कुत्ते देते थे मजदूरों का पहरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन पीड़ित मजदूरों को उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड और पड़ोसी देश नेपाल के रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और सार्वजनिक स्थानों से अच्छी नौकरी और रहने की जगह का लालच देकर लाया गया था। फैक्ट्री पहुंचते ही सबसे पहले इनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिए गए। मजदूरों को आधी रात तक बिना ठीक से खाना दिए, मजदूरी करने पर मजबूर किया जाता था। अगर कोई भागने की कोशिश करता, तो उन्हें डराने और रोकने के लिए खतरनाक 'पिटबुल' नस्ल के कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता था। इस फैक्ट्री का खुलासा तब हुआ जब एक मजदूर किसी तरह जान बचाकर फैक्ट्री से भागने में सफल रहा। उसने तुरंत तितवी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए फैक्ट्री पर छापा मारा और बाकी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस के अनुसार, इस प्रताड़ना के कारण एक मजदूर की मौत भी हो चुकी है।
NHRC के सख्त निर्देश: DM जांच करें, ई-श्रम पर हो रजिस्ट्रेशन
मानवाधिकार आयोग ने मुजफ्फरनगर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को निर्देश दिया है कि वे श्रम और रोजगार मंत्रालय के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत इस पूरे मामले की गहन जांच करें। इसके साथ ही, आयोग ने सभी पीड़ित मजदूरों को तुरंत ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर करने और आयोग के 8 दिसंबर 2021 के परामर्श के तहत उन्हें तत्काल सहायता और पुनर्वास देने के आदेश दिए हैं। मामले में पुलिस फरार आरोपियों की तलाश और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
