देहरादून/चमोली। चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद के बाद उत्तराखंड में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। गुरुवार को पंजाब और चंडीगढ़ से आए करीब 200 निहंग सिखों के जत्थे ने हिमाचल प्रदेश के रास्ते उत्तराखंड में प्रवेश करने की कोशिश की। प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वार्ता विफल होने के बाद कई निहंग बैरिकेडिंग तोड़कर उत्तराखंड में दाखिल हो गए। जानकारी के अनुसार, कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारा प्रकरण को लेकर निहंग सिखों में नाराजगी है। हाल ही में नगरासू गुरुद्वारे में विवाद के बाद चार निहंगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी कार्रवाई के विरोध में निहंगों का जत्था उत्तराखंड की ओर रवाना हुआ।
निहंगों के उत्तराखंड कूच की सूचना मिलने के बाद पुलिस सुबह से ही अलर्ट पर थी। विकासनगर के कुल्हाल चेकपोस्ट और डाकपत्थर सीमा क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। पुलिस के साथ आईटीबीपी के जवान भी तैनात किए गए थे और हिमाचल प्रदेश से आने वाले वाहनों की सघन जांच की जा रही थी।
शाम करीब पांच बजे निहंग सिखों का जत्था पांवटा साहिब पहुंचा, जहां प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। एसडीएम विनोद कुमार, एसपी देहात पंकज गैरोला समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और गुरुद्वारे में करीब दो घंटे तक वार्ता चली, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
वार्ता विफल होने के बाद निहंग सिख आगे बढ़े और कुल्हाल चेकपोस्ट पहुंच गए। यहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन निहंगों ने बैरिकेड पार कर दिए। इस दौरान कुछ निहंग तलवारें लहराते हुए आगे बढ़ते दिखाई दिए। आरोप है कि उन्होंने रास्ते में दो डंपरों के शीशे भी तोड़ दिए। इसके बाद जत्था बल्लूपुर-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग से धर्मावाला की ओर बढ़ गया।
जत्थे का नेतृत्व कर रहे जसदीप सिंह ज्ञानी ने कहा कि उनकी मुख्य मांग चारों निहंगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की है। उन्होंने कहा कि निहंग सिख किसी तरह का टकराव नहीं चाहते और यदि जरूरत पड़ी तो माफी मांगने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन हेमकुंड साहिब की यात्रा से उन्हें रोका नहीं जाना चाहिए।
वहीं, पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि निहंग सिखों को शांतिपूर्ण तरीके से समझाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बीच चंडीगढ़ से निहंगों के दूसरे जत्थे के भी पांवटा साहिब पहुंचने और अन्य समूहों के उत्तराखंड की ओर बढ़ने की सूचना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
