Vrindavan News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ कर दिया कि वह वृंदावन के मशहूर बांके बिहारी मंदिर में धार्मिक रीति-रिवाजों के संबंध में मौजूदा व्यवस्था में "कोई ढांचागत बदलाव" नहीं करेगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ वकील श्याम दीवान और वकील तन्वी दुबे की दलीलों पर ध्यान दिया और निर्देश दिया कि मामले को दो हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए ताकि पक्षों को हाल में दायर की गई स्थिति रिपोर्ट पर जवाब देने का मौका मिल सके। शीर्ष अदालत ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की प्रबंध समिति और सेवायतों (पुजारियों) की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत द्वारा बनाई गई उच्चाधिकार प्राप्त समिति के हाल के प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दी है, जिनमें कथित तौर पर सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं में दखल दिया गया है।
12 सदस्यों वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति
इससे पहले, अदालत ने उत्तर प्रदेश बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी थी और मंदिर के कामकाज की देखरेख के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार की अगुवाई में 12 सदस्यों वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाई थी। दीवान ने अदालत को बताया कि उन्हें रविवार देर शाम स्थिति रिपोर्ट दी गई और उन्हें जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया जाए।
कोई ढांचागत बदलाव करने के लिए तैयार नहीं
प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई टालते हुए कहा, "हम मौजूदा व्यवस्था में कोई ढांचागत बदलाव करने के लिए तैयार नहीं हैं।" अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति अदालत के निर्देशों के अनुसार चलना चाहती है और इस मामले में कोई विपरीत रुख नहीं अपनाया जाएगा। शीर्ष अदालत ने 15 दिसंबर, 2025 को याचिका पर नोटिस जारी किए थे और स्थिति रिपोर्ट रविवार को दायर की गई थी।
मंदिर के जरूरी धार्मिक रीति-रिवाजों से जुड़े कुछ आदेश जारी
पीठ ने एक आवेदन पर नोटिस भी जारी किया जिसमें कुछ तथ्यात्मक और दूसरे आधार उठाए गए हैं, जिनमें बदलाव या स्पष्टीकरण की जरूरत है। याचिकाकर्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई है कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने अपनी उच्च शक्तियों का मतलब कैसे निकाला है, जिसने मंदिर के जरूरी धार्मिक रीति-रिवाजों से जुड़े कुछ आदेश जारी किए हैं। इसमें दर्शन के समय में बदलाव, देहरी पूजा की रस्म बंद करना, सेवायत गोस्वामी पर फूल बंगला सेवा के लिए बहुत ज्यादा शुल्क लगाना आदि शामिल हैं।
(इनपुट - भाषा)
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