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Highway पर खत्म की गईं रेलवे क्रॉसिंग, इतने प्रतिशत कम हुए एक्सीडेंट; इस योजना के पूरे 9 साल

Setu Bharatam Project: सेतु भारतम् के नौ साल पूरे हो चुके हैं। इस योजना के तहत नेशनल हाईवे पर रेलवे क्रॉसिंग पूरी खत्म करने से दुर्घटनाओं में 50 फीसदी की कमी आई है।

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(फाइल फोटो)

Setu Bharatam Project: रेलवे क्रॉसिंग पर हादसों में कमी लाने और यातायात में देरी को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने नौ साल पहले सेतु भारतम् की शुरुआत की थी। इस मिशन के तहत ओवरब्रिज या अंडरपास बनाकर रेलवे क्रॉसिंग समाप्त किए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 'मोदी स्टोरी डॉट इन' के एक पोस्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 4 मार्च 2016 को लॉन्च की गई सेतु भारतम् योजना का लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर रेलवे क्रॉसिंग समाप्त कर अनावश्यक देरी को कम करना था।

दुर्घटनाओं में भी 50 प्रतिशत की कमी

पोस्ट में बताया गया है कि पीएम मोदी ने कई पहल की हैं, जिनसे विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है, जिनमें दशकों से उपेक्षित कुछ क्षेत्र भी शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि भारत सेतु परियोजना के तहत सैकड़ों रेलवे ओवरब्रिज और अंडरब्रिज बनाए गए। इससे न केवल राजमार्गों पर यात्रा की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, बल्कि दुर्घटनाओं में भी 50 प्रतिशत की कमी आई।

पोस्ट के साथ एक वीडियो भी शेयर किया गया है। इसमें बताया गया है कि सेतु भारतम् की लॉन्चिंग से पहले देश में रेलवे क्रॉसिंगों पर अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती थीं। रेलवे क्रॉसिंग बंद होने पर लोगों को परेशानी भी उठानी पड़ती थी और यातायात में देरी भी होती थी। लेकिन, 2016 के बाद अब सूरत बदल चुकी है। लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के मिशन के तहत अनगिनत ओवरब्रिज और अंडरपास बनाकर नेशनल हाईवे पर रेलवे क्रॉसिंग पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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