पवित्र सावन माह के दूसरे सोमवार को लेकर देशभर के प्रमुख मंदिर और शिवालय तड़के से ही 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज रहे हैं। वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम तक लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की।
काशी विश्वनाथ में मंगला आरती और पुष्पवर्षा
वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर भगवान विश्वेश्वर की भव्य एवं अलौकिक मंगला आरती संपन्न हुई। दर्शन के लिए कतारबद्ध खड़े शिवभक्तों और कांवड़ियों पर मंदिर के एसडीएम शंभू शरण ने फूलों की पंखुड़ियां बरसाकर उनका स्वागत किया। वाराणसी के जिलाधिकारी (DM) सत्येंद्र कुमार ने पूरे मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता और पेयजल सुविधाओं का जायजा लिया और दूर-दराज से आए कांवड़ियों और श्रद्धालुओं से बातचीत कर उनका हालचाल जाना।
वाराणसी जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने सावन के दूसरे सोमवार पर सभी शिवभक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं दी और कहा कि भगवान शिव की कृपा से हर किसी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का वास हो। साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि श्रद्धालुओं की सुगम दर्शन व्यवस्था के लिए सभी कड़े सुरक्षा व नागरिक इंतजाम किए गए हैं।
बाबा बैद्यनाथ धाम में 3.5 लाख श्रद्धालुओं की भीड़
झारखंड के देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में सावन के दूसरे सोमवार पर आस्था का महासैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन के अनुसार, इस पावन अवसर पर 3.5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं द्वारा गर्भगृह में जल अर्पित करने का अनुमान है। सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर पहुंचे कांवड़ियों की कई किलोमीटर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
दिल्ली से हरिद्वार और यूपी के शिवालयों में लगीं लंबी कतारें
देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों के प्रमुख मंदिरों में तड़के 12 बजे से ही जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया। यूपी सीतापुर के प्रसिद्ध श्याम नाथ मंदिर में रात 12 बजे से ही जलाभिषेक शुरू हो गया। एसडीएम (सदर) जनार्दन ने बताया कि भीड़ को देखते हुए रूट डायवर्जन और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, जिससे यातायात और दर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहे हैं। हापुड़ के सिद्ध पीठ सबली महादेव मंदिर में भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। कानपुर के प्राचीन नागेश्वर शिव मंदिर में भक्तों ने भांग, धतूरा, बेलपत्र और जल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। हरिद्वार के पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़ियों और स्थानीय श्रद्धालुओं का हुजूम बना रहा। दिल्ली के चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक गौरी शंकर मंदिर में भोर से ही दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी।
