Sugar News : केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश की चीनी मिलों को अपनी सोच बदलने और भविष्य की तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि केवल सादी चीनी बेचने के भरोसे रहने से चीनी उद्योग का भविष्य बहुत उज्ज्वल नहीं है। देश में E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिला हुआ ईंधन) की सफलता के बाद, अब उन्होंने चीनी मिलों से कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG), बायो-खाद और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (हवाई जहाज का जैविक ईंधन) बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है।
आयात पर निर्भरता कम करने का रोडमैप
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि भारत का कृषि क्षेत्र देश के भारी-भरकम ईंधन आयात बिल को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने आंकड़े शेयर करते हुए बताया कि भारत हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये पेट्रोल, डीजल और गैस जैसी जीवाश्म ईंधनों के आयात पर खर्च करता है। अगर कृषि अवशेषों, पराली, गन्ने की खोई और प्रेस मड का सही इस्तेमाल करके बायो-गैस बनाई जाए, तो यह पैसा देश के भीतर ही रहेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
किसानों की कमाई 6,000 रुपये प्रति टन तक पहुंचने की उम्मीद
गडकरी के अनुसार, चीनी मिलें जब गन्ने के सह-उत्पादों (बाय-प्रोडक्ट्स) से मूल्यवर्धित चीजें बनाएंगी, तो उनकी कमाई में भारी इजाफा होगा। इस अतिरिक्त कमाई का सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। वर्तमान में किसानों को गन्ने का भाव करीब 4,000 रुपये प्रति टन मिलता है, जो इन नए सह-उत्पादों के निर्माण से बढ़कर 6,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच सकता है। कचरे और अवशेषों को सड़कों किनारे फेंकने के बजाय उससे ऊर्जा बनाना किसानों और मिलों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
CBG में छिपा है रोजगार और कमाई का बड़ा मौका
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत में रोजाना 50,000 टन CBG उत्पादन की क्षमता है, लेकिन फिलहाल हम इसकी क्षमता का केवल 2 प्रतिशत ही इस्तेमाल कर पा रहे हैं। देश में 1,908 CBG प्लांट रजिस्टर्ड हो चुके हैं, जिनमें से 132 में उत्पादन शुरू भी हो चुका है। सरकार ने इसके लिए 106 रुपये प्रति किलो की निश्चित खरीद दर तय की है और अनिवार्य खरीद नियम लागू किए हैं। इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आ सकता है और करीब 15 लाख नए रोजगार पैदा हो सकते हैं।
गोबरधन योजना से बायो-एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा
बायो-गैस क्षेत्र को रफ्तार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने गोबरधन (GOBARdhan) योजना को मंजूरी दी है, जिसके लिए 23,731 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में कंप्रेस्ड बायो-गैस के उत्पादन को दस गुना तक बढ़ाना है।
क्या है CBG और यह CNG से कैसे अलग है?
कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) एक नवीकरणीय (रिन्यूएबल) गैस है, जिसे कृषि अवशेष, गोबर, गन्ने की खोई, पराली और जैविक कचरे से तैयार किया जाता है। इस कचरे को ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सड़ाकर बायो-गैस बनाई जाती है और फिर इसे शुद्ध करके मीथेन गैस निकाली जाती है।
सीएनजी (CNG) और सीबीजी (CBG) दोनों में मुख्य रूप से मीथेन गैस ही होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि CNG जमीन के नीचे प्राकृतिक भंडारों से निकाली जाती है, जबकि CBG को जैविक कचरे से तैयार किया जाता है। शुद्धिकरण के बाद CBG के गुण बिल्कुल प्राकृतिक गैस जैसे ही हो जाते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि CBG को मौजूदा CNG गाड़ियों में बिना किसी बदलाव के ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे CNG के पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए सप्लाई भी किया जा सकता है।
