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रुड़की : पाखंडी बाबाओं पर 'कालनेमि' की नजर, तंत्र-मंत्र करने वाले 6 गिरफ्तार; ऐसे करते थे आकर्षित

उत्तराखंड की रुड़की पुलिस 'ऑपरेशन कालनेमि' के तहत तंत्र मंत्र दिखाकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले 6 पाखंडी बाबाओं को गिरफ्तार किया है।

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रुड़की में पाखंडी बाबा गिरफ्तार

रुड़की : जिले की पिरान कलियर थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने 'ऑपरेशन कालनेमि' के चलते पिरान कलियर के आसपास से 6 पाखंडी बाबाओं को गिरफ्तार कर लिया है। यह पाखंडी बाबा तंत्र मंत्र दिखाकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। जिस कारण आम लोगों के उग्र होने की संभावना बन रही थी। इसी के चलते पुलिस ने 6 पाखंडी बाबाओं को गिरफ्तार कर लिया है।

सीएम ने दिए थे आदेश

बता दें कि कुछ दिन पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले पाखंडी बाबाओं के खिलाफ ऑपरेशन कालनेमि चलाने का आदेश दिया था, जिसके बाद पुलिस के द्वारा ऑपरेशन कालनेमि के चलते लगातार पाखंडी बाबाओ को गिरफ्तार किया जा रहा था। इसी के चलते पिरान कलियर पुलिस के द्वारा भी पिरान कलियर के आसपास से 6 पाखंडी बाबाओं को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मुरादाबाद निवासी इरशाद पुत्र बरकतुल्लाह, मुरादाबाद निवासी आकिल पुत्र मारुत, मुरादाबाद निवासी बिजेंद्र पुत्र जगत सिंह, मुंबई निवासी रिजवनूर रहमान पुत्र जियाउल इस्लाम, कोलकाता निवासी मोहम्मद फैज आलम पुत्र मंसूर आलम, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर निवासी मंसूर खान पुत्र भोला खान के नाम शामिल है।

यह पाखंडी बाबा तंत्र-मंत्र का सहारा लेकर लोगों को अपनी और आकर्षित कर रहे थे। जिस कारण जनता के उग्र होने की संभावना बन रही थी। जिसके बाद पुलिस के द्वारा पाखंडी बाबाओ को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के द्वारा सभी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है। पुलिस के द्वारा आज बुधवार को करीब 3:00 बजे प्रेस नोट जारी कर मामले की जानकारी दी गई है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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