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क्या 'वोट चोरी' के मुद्दे पर Rahul Gandhi ने खींच दी लंबी लकीर, दूसरी पार्टियां भी हुईं प्रदर्शन को मजबूर!

कथित वोट चोरी के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA Bloc के आंदोलन ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इस आंदोलन के जरिए राहुल गांधी ने अपनी लकीर इस तरह खींची है कि अन्य दलों को भी इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा है।

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Photo : PTI
कथित वोट चोरी मुद्दे पर राहुल गांधी ने खींच दी लंबी लकीर!
Authored by: दिगपाल सिंह
Updated Oct 9, 2026, 17:26 IST
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Rahul Gandhi लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। वैसे तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन पर सभी की निगाहें होती हैं, लेकिन कथित 'Vote Chori' मामले में वह अलग ही तरह से निखरकर सामने आए हैं। इस मुद्दे पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं। वह बार-बार CEC ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर 'वोट चोरी, सरकार चोरी' का आरोप लगा रहे हैं। इस मुद्दे पर वह लगातार आंदोलनरत हैं और उनके आंदोलन की आंच इतनी तेज है कि अब वैसे राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने लगे हैं, जो INDIA Bloc से जुड़े नहीं हैं। ऐसे में प्रश्न यह है कि क्या राहुल गांधी ने कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर अपनी लकीर इतनी लंबी खींच दी है कि अन्य दलों को मजबूरी में ही सही उनके मुद्दे पर आवाज उठानी पड़ रही है।

NEET पेपरलीक मुद्दे पर पिछड़े, लेकिन

राहुल गांधी देश में विपक्ष के नेता हैं और सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता हैं। जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में पेपरलीक के मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन हुए। नई नवेली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पेपरलीक के मुद्दे को हाथों-हाथ लिया। NEET पेपरलीक के मुद्दे पर हालांकि, राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' के तहत कई शहरों में कार्यक्रम किए। लेकिन वह INDIA Bloc को लेकर इस मुद्दे पर वैसा माहौल नहीं बना सके, जैसे उन्होंने अभी कथित 'वोट चोरी' को लेकर बनाया है। हालांकि, CJP के प्रदर्शन के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री आवास पर धरना-प्रदर्शन किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता और लाइमलाइट नहीं मिल पायी। इस बीच उन्होंने CJP की मांग को समर्थन देकर उन्हें अपनी तरफ करने में जरूर सफलता हासिल की। NEET पेपर लीक मामले को उठाने से लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक का पूरा श्रेय CJP ले गई।

'वोट चोरी' के मुद्दे पर दलों को एकजुट किया

कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर राहुल गांधी ने न सिर्फ कांग्रेस बल्कि पूरे INDIA Bloc को एकजुट कर लिया है। वह इस विपक्षी गठबंधन के सर्वमान्य नेता के रूप में सामने आए हैं। जिस तरह से उनकी अगुवाई में गठबंधन सड़कों पर उतरकर सरकार को घेर रहा है, उससे सरकार के लिए CEC ज्ञानेश कुमार का बचाव करना मुश्किल हो रहा है। इस मामले में राहुल गांधी की स्ट्रैटजी इतनी सफल रही है कि उन दलों पर भी दबाव बढ़ रहा है, जो विपक्षी गठबंधन का हिस्सा भी नहीं हैं। शायद यही कारण है कि बीजू जनता दल (BJD) को भी विपक्ष के मार्च में शामिल होना पड़ा। यही नहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर है।

CJP के आगे भी खींची लंबी लकीर!

भले ही NEET पेपर लीक मामले में राहुल गांधी और India Bloc, CJP से पिछड़ गए हों, लेकिन कथित वोट चोरी के मुद्दे पर उन्होंने CJP के आगे भी एक लंबी लकीर खींच दी है। उनका आक्रामक आंदोलन न सिर्फ अन्य पार्टियों को CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए एकजुट कर रहा है, बल्कि CJP को भी इसमें शामिल होने पर मजबूर कर दिया है। अब कल यानी शनिवार 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) इस मुद्दे पर दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रही है। हालांकि, प्रशासन की तरफ से इस आंदोलन को दबाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि CJP के प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है। उधर रेलवे ने सुबह 4 से दोपहर 2 बजे के बीच दिल्ली आने वाली ट्रेनों को कैंसिल कर दिया है और दिल्ली मेट्रो ने भी 57 स्टेशन पर एंट्री-एग्जिट बंद रखने का फैसला किया है।

राहुल गांधी के प्रदर्शन में सर्प्राइज एलिमेंट

भले ही CJP के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने बड़ी तैयारी की है। लेकिन कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर राहुल गांधी की रणनीति CJP से ज्यादा सुर्खियों में है। प्रदर्शन के पुराने तरीकों को छोड़ते हुए राहुल गांधी लगातार लोगों और सुरक्षाबलों को सर्प्राइज कर रहे हैं। जैसे वह INDIA Bloc के 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' के दौरान अचानक आकाशवाणी भवन में घुस जाते हैं और फिर कभी अचानक से मार्च शुरू कर देते हैं। वह पुलिसकर्मियों से पूछते हैं कि आप ही बता दो, मैं कहां धरना-प्रदर्शन करूं। जब पुलिस उन्हें अपने घर जाने के लिए कहती है, तो वह कहते हैं, नहीं... घर नहीं, दिल्ली में कोई भी जगह बता दो... वहां धरना करूंगा।

कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर राहुल गांधी और INDIA Bloc के आंदोलन की एक सफलता ये भी है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से इस मामले पर बार-बार सफाई दी जा रही है। एक के बाद एक भाजपा प्रवक्ता मीडिया के सामने आकर उनके आरोपों का जवाब देने के साथ ही राहुल गाधी पर हमला करते हुए दिख रहे हैं। संभवत: साल 2014 में सत्ता में आने के बाद यह पहली बार है, जब सरकार इतने ज्यादा दबाव में नजर आ रही है। इसका श्रेय निश्चित तौर पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जाता है। इस तरह कहा जा सकता है कि राहुल गांधी ने अपनी एक लकीर लंबी खींच दी है, जिसका असर आने वाले चुनावों में नजर आ सकता है।

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