तेलंगाना में आवारा कुत्तों पर क्रूरता; मेनका गांधी की बहन समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन
- Edited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Jan 25, 2026, 12:17 AM IST
तेलंगाना में आवारा कुत्तों और बंदरों की कथित हत्या की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में जगित्याल और अन्य जिलों में सैकड़ों कुत्तों को मारने की रिपोर्टें सामने आई हैं, जिससे पशु अधिकार कार्यकर्ता गंभीर रूप से चिंतित हैं। राजधानी दिल्ली में भी इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें इस क्रूरता के खिलाफ संदेश मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की मांग की गई।
विरोध प्रदर्शन के दौरान मेनका गांधी की बहन अंबिका शुक्ला (फोटो: ANI)
Telangana Stray Dog Killings: तेलंगाना में आवारा कुत्तों को कथित तौर पर मारने की घटनाओं का सिलसिला जारी है। हाल ही में जगित्याल जिले में लगभग 300 कुत्तों को मार दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि राज्य में अब तक इस तरह की घटनाओं में मारे गए कुत्तों की संख्या लगभग 900 तक पहुंच चुकी है। आरोप है कि यह कृत्य कुछ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, जिनमें ग्राम पंचायत के सरपंच भी शामिल हैं, के इशारे पर किया गया। बताया जा रहा है कि यह कदम दिसंबर में हुए ग्राम पंचायत चुनावों से पहले ग्रामीणों से किए गए वादों के अनुसार उठाया गया।
जहरीले इंजेक्शन से मारा गया
ताजा मामला 22 जनवरी को पेगाडापल्ली गांव का है, जहां शिकायत दर्ज कराई गई कि लगभग 300 आवारा कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन से मार दिया गया। शिकायत में गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव को जिम्मेदार ठहराया गया। आरोप है कि सरपंच ने कुत्तों को मारने के लिए कुछ लोगों को यह काम सौंपा था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। निरीक्षक सी. किरण ने बताया कि जांच के दौरान कब्र से लगभग 70-80 कुत्तों के शव बरामद किए गए, जो करीब तीन से चार दिन पहले दफनाए गए थे। उन्होंने कहा कि फिलहाल आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की जा सकती और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
दिल्ली में तेलंगाना भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन
इसी बीच, राजधानी दिल्ली में तेलंगाना भवन के बाहर आवारा कुत्तों और बंदरों की कथित हत्या के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व सांसद मेनका गांधी की बहन, अंबिका शुक्ला ने कहा, “एक ही हफ्ते में 1,000 से अधिक कुत्ते मारे गए, और यह उस देश में हो रहा है जिसे महात्मा गांधी ने अहिंसा की शिक्षा दी। इस भूमि में जहां हम जानवरों की पूजा करते हैं और कुत्तों को भगवान भैरव का प्रतीक माना जाता है, वहां आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों के प्रति इस तरह का क्रूर व्यवहार शर्मनाक है। ” इसके साथ ही, सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने कहा, “...हमें यह जानकर हैरानी हुई कि ऐसी हत्याओं का आदेश कैसे दिया गया, जबकि लगातार खबरें आ रही हैं कि आवारा कुत्तों को मार दिया गया, जैसे यह कोई मजाक हो। क्या उनके कोई अधिकार नहीं हैं सिर्फ इसलिए कि वे अपनी आवाज नहीं उठा सकते? यह समस्या लगातार बढ़ रही है, अब बंदरों की हत्या की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। हम यहां विरोध करने आए हैं और चाहते हैं कि हमारा संदेश तेलंगाना के मुख्यमंत्री तक पहुंचे।”
कुत्तों को मारने की अन्य घटनाएं
जनवरी महीने में ही राज्य में आवारा कुत्तों को मारने की कई अन्य घटनाएं सामने आई हैं। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की शिकायत के अनुसार, 19 जनवरी को हैदराबाद के पास याचारम गांव में 100 कुत्तों को कथित तौर पर जहर देकर मार दिया गया, जिसमें मौके से 50 मृत कुत्ते बरामद हुए। इसी महीने हनमकोंडा जिले के श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में लगभग 300 कुत्तों के मारे जाने के मामले में पुलिस ने दो महिला सरपंच और उनके पतियों समेत नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके अलावा कामारेड्डी जिले में करीब 200 कुत्तों को मारने के मामले में पांच ग्राम सरपंचों समेत छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
(इनपुट - भाषा)
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