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रांची में छात्रों का आंदोलन बना जनआंदोलन, 'लंबी ये लड़ाई है, जीतेंगे' के नारों के बीच आम लोग बने सहारा

आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल या सरकार से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जिस पर उनका भरोसा टूट चुका है। उनका आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही कथित गड़बड़ियों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है।

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छात्रों ने रांची में निकाला फ्लैशलाइट मार्च। (फोटो- PTI)

झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली, अनियमितता और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। यहां जयपाल सिंह स्टेडियम में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी, छात्र-छात्राएं और उनके परिवार के सदस्य कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। वहीं ये आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम नागरिक भी बढ़-चढ़कर इसमें सहयोग कर रहे हैं।

आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल या सरकार से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जिस पर उनका भरोसा टूट चुका है। उनका आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही कथित गड़बड़ियों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। इसलिए वे पूरे मामले की CBI जांच और भर्ती परीक्षाओं में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

आमजन पहुंचा रहे खाना-पानी

धरनास्थल पर इन दिनों एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। कोई खाने के लिए पूरी-सब्जी लेकर पहुंच रहा है, तो कोई बिस्किट, पानी और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध करा रहा है। कई सामाजिक और धार्मिक संगठन भी भंडारे के माध्यम से प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि लोग अपनी क्षमता के अनुसार मदद कर रहे हैं और यही सहयोग उनके आंदोलन को मजबूती दे रहा है। छात्रों का कहना है कि उनके आंदोलन को अब झारखंड ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से भी समर्थन मिल रहा है। कई लोग ऑनलाइन माध्यम से आर्थिक सहायता और आवश्यक सामग्री भेज रहे हैं। कुछ दिन पहले तक बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर छात्र अब टेंट लगाकर लंबे विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। अपने प्रदर्शन के दौरान ये छात्र लगातार 'लंबी ये लड़ाई है, लेकिन हम जीतेंगे' के नारे लगा रहे हैं।

अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि बातचीत के लिए नहीं आया

प्रदर्शनकारी छात्रों का यह भी कहना है कि जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन हुआ था, तब कई राजनीतिक दलों के नेता समर्थन में पहुंचे थे। लेकिन रांची में चल रहे आंदोलन के दौरान अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि बातचीत के लिए नहीं आया। इसी को लेकर छात्र सवाल उठा रहे हैं कि क्या विपक्ष में रहने पर और सत्ता में रहने पर आंदोलन के प्रति नजरिया बदल जाता है।

छात्रों ने निकाला शांतिपूर्ण फ्लैशलाइट मार्च

इसी क्रम में छात्रों ने रांची में एक शांतिपूर्ण फ्लैशलाइट मार्च भी निकाला। हाथों में भारत का संविधान, तिरंगा और झारखंड आंदोलन के प्रतीक रहे शिबू सोरेन तथा बिरसा मुंडा की तस्वीरें लेकर बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे। मार्च के दौरान छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग दोहराई। उनका कहना था कि भविष्य में किसी भी अभ्यर्थी को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव जरूरी है।

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि इस पूरे मामले की जांच फिलहाल CID कर रही है। वहीं, JPSC अध्यक्ष अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं और मामले में कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इसके बावजूद आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उन्हें राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है, इसलिए वे निष्पक्ष जांच के लिए CBI से जांच कराने की मांग पर कायम हैं।

Abhishek Raj
अभिषेक राजauthor

मैं अभिषेक राज वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में सीनियर रिपोर्टर के पद पर कार्यरत हूँ, मैं टाइम्स नाउ नवभारत के लिए national crime इंवेस्टिगेशन और स्पेशल स्टोरी का काम देखता हूं। इससे पहले मैं ZEE न्यूज़ में crime और इन्वेस्टीगेशन विभाग में रिपोर्टर के पद पर तैनात था. मैंने ऑपरेशन मुख्यमंत्री, ऑपरेशन धर्ममंत्रण के स्लीपर सेल, ऑपरेशन किसान आंदोलन जीवी, श्रद्धा मर्डर केस, तुनिषा शर्मा आत्महत्या केस, हिमाचल बाढ़ त्रासदी, एल्विश यादव केस आदि जैसी कई स्टोरीज़ की हैं।

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