राँची

झारखंड के इस गांव में हिंदू संग मुस्लिम भी खेलते हैं होली, पत्थरों की होती है 'बारिश'

  • Edited by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 26, 2024, 05:30 PM IST

झारखंड के लोहरदगा में ग्रामीण पत्थर मार होली खेलते हैं। खास बात यह है कि यहां हिंदू के साथ मुस्लिम भी इसमें शामिल होते हैं। गांव में पत्थर मार होली खेलने की परंपरा काफी पुरानी है।

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पत्थर मार होली।

Photo : Twitter

Lohardaga Patthar Mar Holi: झारखंड के लोहरदगा जिला के बरही चटकपुर गांव में मंगलवार को वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार ढेलों की बारिश के बीच होली मनाई गई। गांव के मैदान में गाड़े गए एक विशेष खंभे को छूने-उखाड़ने की होड़ के बीच मिट्टी के ढेलों की बारिश की जाती है।

लोग बरसाते हैं पत्थर

इस गांव की परंपरा यह है कि होलिका दहन के दिन पूजा के बाद गांव के पुजारी मैदान में खंभा गाड़ देते हैं और होली के दिन इसे उखाड़ने और पत्थर (ढेला) मारने के लिए गांव के तमाम लोग इकट्ठा होते हैं। मान्यता के अनुसार, जो लोग पत्थरों से चोट खाने का डर छोड़कर खूंटा उखाड़ने के लिए बढ़ते हैं, उन्हें सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ये लोग सत्य के मार्ग पर चलने वाले माने जाते हैं।

होली में मुस्लिम भी होते हैं शामिल

गांव के लोगों को कहना है कि इस पत्थर मार होली में आज तक कोई गंभीर रूप से जख्मी नहीं हुआ। खास बात यह है कि इस खेल में गांव के मुस्लिम भी भाग लेते हैं। अब ढेला मार होली को देखने के लिए दूसरे जिलों के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचने लगे हैं। खूंटा उखाड़ने और ढेला फेंकने की इस परंपरा के पीछे कोई रंजिश नहीं होती, बल्कि लोग खेल की तरह भाईचारा की भावना के साथ इस परंपरा का निर्वाह करते हैं।

दूर-दूर से होली देखने आते हैं लोग

लोहरदगा के एक बुजुर्ग मनोरंजन प्रसाद बताते हैं कि बीते कुछ वर्षों में बरही चटकपुर की इस होली को देखने के लिए लोहरदगा के अलावा आसपास के जिले से बड़ी संख्या में लोग जमा होते हैं, लेकिन इसमें सिर्फ इसी गांव के लोगों को भागीदारी की इजाजत होती है। यह परंपरा सैकड़ों वर्षो से चली आ रही है।

कब से शुरू हुई यह परंपरा?

ग्रामीण बताते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत होली पर गांव आने वाले दामादों से चुहलबाजी के तौर पर शुरू हुई थी। गांव के लोग दामादों को खंभा उखाड़ने को कहते थे और मजाक के तौर पर उन पर ढेला फेंका जाता था। बाद में गांव के तमाम लोग इस खेल का हिस्सा बन गए।

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