रायपुर

छत्तीसगढ़ सहित दूसरे राज्यों में भी चला विष्णु देव साय का जादू, जानें कैसा रहा CM साय का स्ट्राइक रेट

Chhattisgarh Politicsछत्तीसगढ़ सहित मध्यप्रदेश और ओडिशा में भाजपा की प्रचंड जीत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अहम योगदान रहा। उन्होंने जहां-जहां सभाएं की वहां अधिकतर जगहों में भाजपा का परचम लहराया। सीएम साय का छत्तीसगढ़ में 91 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 100 प्रतिशत और ओडिशा में 86 प्रतिशत सक्सेस स्ट्राइक रेट रहा।

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विष्ण देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़।

Raipur News: देश में हुए लोकसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। छत्तीसगढ़ में 10 सीटों सहित पूरे देश में भाजपा नीत एनडीए गठबंधन ने 293 सीटों पर जीत हासिल की है। इसके साथ ओडिशा विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा ने बहुमत हासिल किया है, तो दूसरी ओर आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी एनडीए गठबंधन को पूर्ण बहुमत हासिल हुई है।

CM विष्णु देव साय का रहा अहम योगदान

छत्तीसगढ़ सहित मध्यप्रदेश और ओडिशा में भाजपा की प्रचंड जीत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अहम योगदान रहा। उन्होंने जहां-जहां सभाएं की वहां अधिकतर जगहों में भाजपा का परचम लहराया। साय का छत्तीसगढ़ में 91 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 100 प्रतिशत और ओडिशा में 86 प्रतिशत सक्सेस स्ट्राइक रेट रहा। इसलिए लोग अब विष्णु देव साय को सुपर स्ट्राइकर सीएम की संज्ञा दे रहे हैं।

जीत पर क्या बोले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री?

सीएम साय ने इस जीत का श्रेय संगठन के कार्यकर्ताओं और जनता को दिया है। उनका कहना है कि भीषण गर्मी की परवाह न कर कार्यकर्ताओं ने बहुत मेहनत की। संगठन के हर नेता ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया, जिसका नतीजा सामने है। वह यह नहीं बताते कि पूरे चुनावी यात्रा में उसी भीषण गर्मी से उन्हें भी दो-चार होना पड़ा। अपनी मेहनत पर उन्हें चर्चा पसंद नहीं वे इसे अपना कर्तव्य मानते हैं। जनता से मिले आशीर्वाद को सिर झुका कर स्वीकार करने वाले सीएम साय की यही नम्रता और सरलता उनके सियासी कद को बड़ा बनाती है।

छत्तीसगढ़ में 91 प्रतिशत रहा सक्सेस स्ट्राइक रेट

छत्तीसगढ़ की सभी 11 लोकसभा सीटों में सीएम साय ने कुल 64 जनसभाएं एवं रोड शो की। जहां उन्होंने बस्तर लोकसभा में 7 जनसभा और रोड शो किया। दूसरे चरण के अंतर्गत कांकेर, राजनांदगांव और महासमुंद में कुल 15 जनसभाएं की। इन चारों लोकसभा सीटों में भाजपा ने जीत दर्ज की। तीसरे चरण की बची हुई 7 सीटों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सरगुजा और कोरबा में सीएम साय ने कुल 42 जनसभाएं की। जिसमें कोरबा लोकसभा में मामूली अंतर से हुई हार को छोड़ दें तो ग्यारह में से 10 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की और अपना परचम लहराया।

अगर इसका विनिंग प्रतिशत निकालें तो मुख्यमंत्री साय की सभाओं का सक्सेस रेट 91 प्रतिशत रहा। मतलब सीएम साय सुपर स्ट्राइकर साबित हुए और अपने तूफानी दौरों की बदौलत से कांग्रेस के पसीने छुड़ा दिए। अपनी हर सभा में कांग्रेस को सबक सिखाने की बात करने वाले सीएम साय ने कांग्रेस को गहरा सबक सिखाया।

ओडिशा के 86 प्रतिशत सक्सेस स्ट्राइक रेट ने बढ़ाया कद

सीएम साय ने ओडिशा में भी जमकर पसीना बहाया। यहां सात लोकसभा सीटों में उन्होंने तूफानी जनसभाएं ली और भाजपा को 6 लोकसभा सीट बरगढ़, बलांगीर, कालाहांडी, नबरंगपुर, संबलपुर और सुंदरगढ़ सीटें जिताकर दी। विधानसभा स्तर पर भी यदि देखें तो यहां झारसुगुड़ा, कोटपाड़, उमरकोट, कोरापुट, तलसरा, बीजेपुर, बीरमहाराजपुर और कुचिंदा सीट को मिलाकर कुल आठ विधायक भी जिताने में वो कामयाब रहे। यहां लोकसभा चुनाव में उनका सक्सेस स्ट्राइक रेट 86 प्रतिशत रहा।

बता दें कि ओडिशा की अपनी हर जनसभा में सीएम साय वहां की बीजेडी सरकार और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ मुखर रहे। उन्होंने ओडिशा की जनता को भाजपा द्वारा दी गई गारंटियों को बड़े ही विस्तार से बताया। नवीन पटनायक को रिमोट कंट्रोल सीएम और कांग्रेस को आदिवासियों का विरोधी बताते हुए ओडिशा के विकास में बाधक होने की बात कही। ओडिशा में साय की हर जनसभाओं में जनता की भारी भीड़ उमड़ी, जो चुनाव में भाजपा के पक्ष में वोट के रूप में फलीभूत हुई।

मध्यप्रदेश में 100 प्रतिशत रहा सक्सेस स्ट्राइक रेट

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में भी 8 जनसभाएं की। जिसमें कुल चार लोकसभा सीट खजुराहो, शहडोल, मंडला, सीधी में उन्होंने मोर्चा संभाला। इन चारों सीटों पर भी भाजपा ने बम्पर मतों से जीत हासिल की है। इसमें मुख्यमंत्री की सभाओं का सक्सेस रेट देखें तो पूरे सौ प्रतिशत का सक्सेस रेट है।

विष्णु ने जिम्मेदारियों का किया निष्ठा पूर्वक निर्वहन

केंद्रीय भाजपा द्वारा मिली जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए विष्णु देव साय छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्यप्रदेश में भाजपा की प्रचंड जीत में अहम किरदार साबित हुए और पीएम मोदी की रणनीति को सफल बनाने में कामयाब हुए। इससे उनके सियासी कद में वृद्धि हुई, इसमें कोई संदेह नहीं है।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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