शहर

पंजाब में ड्रग्स से हुई मौत के बाद छिड़ा नया मुद्दा, अफीम-भुक्की को लीगल किए जाने की उठी मांग

पंजाब में बढ़ती नशाखोरी ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे के बीच वैकल्पिक मादक पदार्थों पर विचार की मांग उठ रही है। ओवरडोज से हो रही मौतों और अधूरे आधिकारिक आंकड़ों के बीच राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की राय भी बंटी हुई नजर आ रही है। सरकार की नशा-विरोधी मुहिम, उसके दावों और विपक्ष के सवालों के बीच यह मुद्दा अब गंभीर सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का विषय बन चुका है।

Punjab Drug Death Sparks Debate (Symbolic Photo)

पंजाब में ड्रग्स से मौत पर नई बहस छिड़ी (सांकेतिक फोटो)

Punjab News: पंजाब में बढ़ती नशाखोरी को लेकर एक नई बहस सामने आई है। कुछ लोगों का मानना है कि नशे को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय युवाओं को जानलेवा सिंथेटिक ड्रग्स से दूर रखने के लिए कम घातक विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। राज्य में ‘चिट्टा’ के नाम से प्रचलित सिंथेटिक ड्रग्स और नशीले इंजेक्शनों ने युवाओं को बुरी तरह जकड़ रखा है। ऐसे में मांग उठ रही है कि इन खतरनाक नशों से बचाने के लिए अफीम और भुक्की जैसे पारंपरिक मादक पदार्थों को नियंत्रित तरीके से विकल्प के रूप में उपलब्ध कराया जाए। पंजाब में नशे की समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है, इसका अंदाजा रोज होने वाली ओवरडोज से युवाओं की मौतों से लगाया जा सकता है। हालांकि राज्य सरकार ने “नशे के खिलाफ युद्ध” जैसे अभियान चलाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित सुधार अभी भी दिखाई नहीं दे रहा है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2023 तक के ही आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक 2023 में ड्रग्स के कारण 89 लोगों की जान गई थी, जबकि 2022 में यह संख्या 144 रही थी। वर्ष 2024 और 2025 के लिए अभी तक आधिकारिक डेटा जारी नहीं हुआ है, हालांकि इन वर्षों में भी पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से ओवरडोज की कई घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 और 2025 में नशे की अधिक मात्रा लेने से मौतों के मामलों में अब तक का सबसे बड़ा उछाल देखने को मिला है। इसी पृष्ठभूमि में कुछ वर्गों द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि सिंथेटिक ड्रग्स, नशीले इंजेक्शन और कैप्सूल जैसे खतरनाक पदार्थों से युवाओं को बचाने के लिए उन्हें नियंत्रित रूप से पारंपरिक मादक पदार्थों का विकल्प उपलब्ध कराया जाए, ताकि जानलेवा नशों की चपेट से उनकी जिंदगी बचाई जा सके।

वैकल्पिक उपायों पर विचार करने की जरूरत

हाल ही में अमृतसर में एक युवक की नशीला इंजेक्शन लेने के बाद हुई मौत ने पंजाब में नशे को लेकर चल रही बहस को फिर से तेज कर दिया है। हालांकि इससे पहले भी राज्य के कई नेता इस मुद्दे को उठा चुके हैं, लेकिन अब एक बार फिर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने वैकल्पिक उपायों पर विचार करने की आवश्यकता जताई है। उन्होंने कहा कि सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे को देखते हुए अन्य विकल्पों पर चर्चा करना जरूरी हो गया है। उनके अनुसार, अफीम और भुक्की जैसे पारंपरिक मादक पदार्थों का सेवन करने वालों की मौत के मामले कम सुनने में आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी अफीम के ओवरडोज से किसी की मृत्यु की घटना नहीं सुनी। वडिंग का तर्क है कि यदि युवाओं को जानलेवा सिंथेटिक नशों से बचाना है, तो पारंपरिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि आगामी विधानसभा सत्र में इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराई जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार का “नशे के विरुद्ध युद्ध” अभियान अपेक्षित परिणाम देने में सफल नहीं रहा है, इसलिए अब नए और वैकल्पिक रास्तों पर सोचने का समय आ गया है।

ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ने में सफलता

भाजपा नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी जगमोहन राजू ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि ऐसी बात वही कर सकता है जो स्वयं अफीम या भांग जैसे नशे का समर्थन करता हो। उनका कहना है कि कानून के तहत किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ को अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए जरूरत इस बात की है कि नशे को पूरी तरह खत्म करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं, न कि किसी भी रूप में उसे वैध बनाने पर विचार किया जाए। वहीं आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता नील गर्ग ने दावा किया कि “युद्ध नशे के विरुद्ध” अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ने में सफलता हासिल की है। साथ ही 20 हजार से अधिक युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर उन्हें पुनर्वास और जागरूकता मुहिम से जोड़ा गया है, जो अब सरकार के प्रयासों का हिस्सा बन चुके हैं।

सियासी बयानबाजी भी हुई तेज

इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कुछ नेताओं का कहना है कि ऐसे समय में वैकल्पिक नशे की बात करना कमजोर सोच को दर्शाता है। उनका आरोप है कि कांग्रेस के कुछ नेता सरकार की नशा-विरोधी मुहिम को कमजोर करना चाहते हैं। उनका यह भी कहना है कि यदि कोई इस अभियान का समर्थन नहीं कर सकता, तो कम से कम ऐसे बयान न दे जो प्रयासों को नुकसान पहुंचाएं। इस विषय पर वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व सलाहकार डॉ. रमणीक बेदी से भी बातचीत की गई। उन्होंने इसे अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस पर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श होना चाहिए। उनके अनुसार, सिंथेटिक ड्रग्स का शरीर पर प्रभाव पारंपरिक मादक पदार्थों जैसे अफीम या भांग की तुलना में कई गुना अधिक घातक होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक नशों के ओवरडोज से मृत्यु के मामले अपेक्षाकृत कम सुनने में आते हैं।

यूपी और राजस्थान में भांग की सीमित रूप से वैधता

डॉ. रमणीक बेदी ने उदाहरण देते हुए बताया कि कनाडा जैसे कुछ देशों में इस तरह के पदार्थों को नियंत्रित रूप में अनुमति दी गई है। भारत में भी उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भांग को सीमित रूप से वैधता प्राप्त है। उनका मानना है कि ड्रग्स की लत से जूझ रहे युवाओं को वैकल्पिक और नियंत्रित मादक पदार्थों के माध्यम से पुनर्वास की दिशा में लाया जा सकता है। अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के अलावा, पटियाला से कांग्रेस सांसद और पूर्व आम आदमी पार्टी नेता डॉ. धरमवीर गांधी भी पहले इस मुद्दे को उठा चुके हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के विधायक हरमीत सिंह पठान माजरा विधानसभा में अफीम की खेती को अनुमति देने की मांग रख चुके हैं। कांग्रेस से निष्काशित डॉ. नवजोत कौर भी अफीम की खेती की हिमायत कर चुकी हैं।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। शहर (Cities News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।

मनोज कुमार
मनोज कुमार author

और देखें

End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!