पुणे

Pune: हाथ-पैर, सिर काट ले गए हत्यारे, नदी में मिली युवती की आधी डेडबॉडी

महाराष्ट्र के पुणे में एक युवती का सिर कटा शव बरामद किया गया है। हत्यारों ने उसके हाथ-पैर और गला काटकर शरीर को नदी में बहा दिया।

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पुणे में युवती का शव बरामद

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

पुणे : शहर से एक बेहद डरावनी घटना सामने आई है। यहां खराड़ी के पास बह रही मुला नदी के तट से एक युवती का शव बरामद किया गया है, जिसके शरीर से हाथ-पैर और सिर गायब हैं। मृतका कहां की रहने वाली थी, अभी इसका खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस को आशंका है कि हत्यारे उसके शरीर के टुकड़े करना चाह रहे थे, लेकिन वो नाकाम रहे। फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

मृतका की शिनाख्त मुश्किल

घटना खराड़ी के पास की बताई जा रही है। यहां नदीपत्र से करीब 18 से 30 साल के बीच आयु की लड़की का शव बरामद किया गया है। युवती की शिनाख्त कर पाना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। आखिर, उसकी हत्या के पीछे क्या कारण है और किसने उसे मौत के घाट उतारा है? इसके लिए चंदननगर थाने की पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को पूर्वाह्न करीब 11 बजे पुलिस नियंत्रण कक्ष को चंदननगर इलाके में नदी के किनारे एक शव पाए जाने के बारे में सूचना मिली। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, महिला का सिर धड़ से अलग करने के साथ उसके हाथ-पैर कंधे और कूल्हे के जोड़ से काटकर अलग किये गये थे। अधिकारी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया है और चंदननगर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या) और 238 (साक्ष्य मिटाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि महिला की पहचान सुनिश्चित करने के लिए जांच की जा रही है और पुलिस गुमशुदगी की शिकायतों की भी जांच कर रही है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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