प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के अपराध के इतिहास में सबसे कुख्यात माफिया के रूप में अपना नाम दर्ज कराने वाले प्रयागराज के अतीक अहमद के काले साम्राज्य का शनिवार रात अंत हो गया। गुजरात के साबरमती से प्रयागराज लाए गए अतीक और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज मेडिकल कॉलेज के बाहर तीन शूटर्स ने पत्रकारों के भेष में हमला करके हत्या कर दी। गोली इतने करीब से दोनों को मारी गई कि वो मौके पर ही ढेर हो गए। किसी को भी कुछ समझने मौका नहीं मिला और पलक झपकते ही दोनों का काम तमाम हो गया।
जहां शुरू हुई आतंक की कहानी वहीं हुआ अंत
अतीक के आंतक का अंत उसी प्रयागराज में हुआ जहां उसने पांच दशक तक राज किया। उसका खौफ ऐसा था कि कोई भी उसके खिलाफ जुबान खोलने या गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। जो उसके सामने आया वो वक्त से पहले काल के गाल में समा गया। यहां तक कि एक मामले में 10 जजों ने भी सुनवाई करने इनकार कर दिया था। ऐसे खौफनाक डॉन की कहानी का अंत भी उसी अंदाज में हुआ जिसका पहला अध्याय उसने खुद लिखा था। जिस जगह आतंक की कहानी शुरू हुई थी वहीं अंत हो गया।
हत्या को योगी सरकार की कानून व्यवस्था की नाकामी बताया
अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या की खबर आते ही राजनीतिक गलियारे भी सक्रिय हो गए। ऐसे में मुसलमानों का नया रहनुमा माने जाने वाले हैदराबाद से लोकसभा सासंद और एआईएमआईएम के अध्यक्ष असददुद्दीन ओवैसी ने अतीक अहमद की हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने ट्वीट कर इसे योगी आदित्यनाथ की सरकार की कानून व्यवस्था की नाकामी बताते हुए कहा, अतीक और उनके भाई पुलिस की हिरासत में थे। उन पर हथकड़ियां लगी हुई थीं। जेएसआर के नारे भी लगाये गये। दोनों की हत्या योगी के कानून व्यवस्था की नाकामी है। एनकाउंटर राज का जश्न मनाने वाले भी इस हत्या के जिम्मेदार हैं।
हालांकि ओवैसी ने अप्रत्यक्ष तौर पर हिंदूवादी संगठनों को इसके लिए जिम्मेदार बताते हुए अपने ट्वीट में जेएसआर का जिक्र किया है जो कि
'जय श्री राम' हो सकता है। ये बात उन्होंने अपने ट्वीट में साफ तौर पर नहीं कही है।
