प्रयागराज

अतीक के आखिरी शब्द, मरने से पहले क्या बोला था माफिया अतीक अहमद

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 15, 2023, 11:47 PM IST

Atiq Ahmed and Ashraf shot Dead: अतीक अहमद की हत्या उस वक्त की गई, जब दोनों मीडिया से बात कर रहे थे। इस दौरान दोनों पुलिस सुरक्षा में थे। तभी हथियार बंद बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी।

Atiq Ahmed and Ashraf shot Dead: माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात गोली मार कर हत्या कर दी गई। दोनों की हत्या तब हुई, जब पुलिस सुरक्षा में उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए लाया जा रहा था। इस दौरान अतीक मीडिया के सवालों का जवाब दे रहा था, तभी हथियार बंद बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। घटना में दोनों भाईयों की मौके पर मौत हो गई।

बेटे के जनाजे की बात कर रहा था अतीकअतीक अहमद और उसके भाई की हत्या का पूरा वीडियो भी सामने आया है। इसमें अतीक और अशरफ पुलिस हिरासत में दिख रहे हैं। इस दौरान मीडिया अतीक से बेटे असद के जनाजे के बारे में सवाल करती है और वहां न पहुंच पाने के बारे में पूछती है, जिसके जवाब में अतीक कहता है बेटे के जनाजे में मुझे नहीं ले गए तो नहीं गया। तभी हमलावर दोनोंं भाईयों पर गोलियों की बौछार कर देते हैं।

पहले अतीक के कनपटी पर लगी गोली

मीडिया से बातचीत के दौरान ही गोलियां चलने की आवाज आती है। पहली गोली अतीक के कनपटी पर लगती है, जिससे वह मौके पर ही ढेर हो जाता है। जब तक वहां मौजूद पुलिसकर्मी कुछ समझ पाते हमलावर उसके भाई पर भी गोलियों की बौछार कर देते हैं। दोनों भाई मौके पर ही गिर जाते हैं।

48 सेकेंड में 35 राउंड फायरिंग

अतीक और अशरफ की हत्या का वीडिया दिल दहला देने वाला है। हत्या के आरोपी तीन लोग हैं। तीनों ने मौके पर ही सरेंडर कर दिया। सामने आया वीडियो 48 सेकेंट का है, जिसमें आरोपी 35 राउंड फायरिंग करते हैं। एक-एक गोली लगने के बाद दोनों भाई जमीन पर गिर जाते हैं। इसके बाद भी बदमाश दोनों पर फायरिंग करते रहते हैं। हालांकि, बाद में वहां मौजूद पुलिसकर्मी बदमाशों पर काबू पा लेते हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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