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गुजरात सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी के पीछे अंतरराज्यीय ई-मेल सिंडिकेट का खुलासा, बिहार-झारखंड से दो आरोपी गिरफ्तार

Gujarat News: गुजरात सचिवालय समेत कई अहम ठिकानों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ई-मेल की जांच में पुलिस को बड़े साइबर नेटवर्क का सुराग मिला है। तकनीकी जांच के आधार पर बिहार और झारखंड से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनके पास से लाखों ई-मेल आईडी और पासवर्ड का डेटा मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के संभावित बांग्लादेश कनेक्शन और इन ई-मेल अकाउंट्स के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की पड़ताल कर रही हैं।

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5 लाख से ज्यादा ई-मेल आईडी किए गए बरामद

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Gujarat News: गुजरात सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ई-मेल की जांच में साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने अंतरराज्यीय ई-मेल सिंडिकेट का खुलासा किया है। मामले में बिहार के भागलपुर से रोशन कुमार राजेंद्र कुमार भूमिहार (राय) और झारखंड के देवघर से गुलशन कुमार कौशल सिंह को गिरफ्तार किया गया है।

10 सितंबर 2026 को सुबह 9:47 बजे गुजरात सरकार के वैधानिक और संसदीय कार्य विभाग के ई-मेल आईडी पर धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था। ई-मेल में गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय, गुजरात विधानसभा, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत का सहयोग कर रहे देशों को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तकनीकी टीम ने ई-मेल का डिजिटल ट्रेल खंगाला तो धमकी वाला ई-मेल बिहार के भागलपुर से ऑपरेट किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके आधार पर टीम ने भागलपुर पहुंचकर रोशन कुमार को पकड़ा।

पूछताछ में क्या सामने आया?

पूछताछ में सामने आया कि रोशन कुमार को यह ई-मेल आईडी झारखंड के देवघर निवासी गुलशन कुमार कौशल सिंह ने उपलब्ध कराई थी। इसके बाद तकनीकी सर्विलांस और फील्ड टीम की संयुक्त कार्रवाई में गुलशन कुमार को भी देवघर से गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान गुलशन कुमार के डिवाइस से 5,13,847 यूनिक ई-मेल आईडी और उनके पासवर्ड की सूची बरामद होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, इन ई-मेल अकाउंट्स का इस्तेमाल सरकारी कार्यालयों, स्कूल-कॉलेजों और न्यायालयों समेत अन्य स्थानों पर धमकी भरे ई-मेल भेजने तथा साइबर और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जाना था। आरोपी ई-मेल अकाउंट तैयार करने और उनकी ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया को बायपास करने के लिए जटिल तरीकों का इस्तेमाल करते थे। मुख्य आरोपी इन ई-मेल आईडी और पासवर्ड को अन्य कथित राष्ट्रविरोधी तत्वों को उपलब्ध कराता था।

बांग्लादेश कनेक्शन की भी जांच जारी

साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क को बांग्लादेश से वित्तीय सहायता और दिशा-निर्देश मिलने से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। इसके लिए क्रिप्टो वॉलेट्स के इस्तेमाल की बात भी जांच में सामने आई है। हालांकि, बांग्लादेश कनेक्शन के पीछे वित्तीय लाभ, निर्देश या किसी अन्य उद्देश्य की भूमिका क्या थी, इसकी जांच अभी जारी है। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के SP विकास भेडा के मुताबिक, जांच में यह भी पता चला कि गुलशन कुमार वर्ष 2022 से इस तरह की ई-मेल आईडी और पासवर्ड तैयार कर रहा था और उन्हें आगे इस्तेमाल के लिए साझा कर रहा था। उसके डिवाइस से मिले डेटा की अब देशभर में सामने आए धमकी भरे ई-मेल मामलों से तुलना और तकनीकी जांच की जाएगी।

ई-मेल को फॉरवर्ड न करें, किसी तरह का कम्युनिकेशन न करें

अधिकारियों के मुताबिक, बरामद 5,13,847 ई-मेल आईडी का संभावित इस्तेमाल भविष्य में धमकी भरे ई-मेल भेजने के लिए किया जा सकता था। इन अकाउंट्स को बैन करने की प्रक्रिया के साथ यह भी जांच की जा रही है कि यह डेटा किन-किन लोगों को बेचा या उपलब्ध कराया गया। पूरे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए तीन राज्यों में एक साथ फील्ड ऑपरेशन चलाया गया। कार्रवाई में गुजरात के गांधीनगर पुलिस, बिहार की भागलपुर पुलिस और झारखंड की देवघर पुलिस से साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की टीम को सहयोग मिला। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने लोगों से अपील की है कि धमकी भरे किसी भी ई-मेल को देखकर अनावश्यक रूप से पैनिक न करें। ऐसे ई-मेल को फॉरवर्ड न करें और भेजने वाले के साथ किसी तरह का संवाद या कम्युनिकेशन न करें। पुलिस ऐसे मामलों का तकनीकी विश्लेषण और जांच कर रही है।

Dhruv Sanchania
ध्रुव संचानियाauthor

ध्रुव संचानिया गुजरात में टाइम्स नेटवर्क के सीनियर जर्नलिस्ट और ब्यूरो चीफ के पद पर कार्यरत हैं। ध्रुव ने प्रिंट, रेडियो, डिजिटल और टीवी पर शानदार काम किया है। क्राइम, इन्वेस्टिगेशन से लेकर इंसानी कहानियों तक में उनका काम गहराई से भरा होता है। जब वह हेडलाइन के पीछे नहीं भाग रहे होते तो वह सड़कों, सिनेमा और अगली छिपी हुई कहानी के पीछे भाग रहे होते हैं। उनका काम ऐसा है जो उन्हें अलग ला खड़ा करता है।

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