पटना

विनेश फोगाट के Disqualify होने पर बिहार के खेल मंत्री ने दिया ज्ञान, आप भी सुनकर पीट लेंगे माथा

बिहार सरकार के खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता चैंपियन खिलाड़ी विनेश फोगाट के बारे में कितना जानते हैं, यह आज उनके बयान से पता चल गया। विनेश किस राज्य से ताल्लुक रखती हैं? यह भी मंत्री जी को नहीं पता।

Image

बिहार के खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Vinesh Phogat Disqualifies: पेरिस ओलंपिक में अपने फाइनल मुकाबले से पहले अयोग्य करार दिए जाने के बाद भारतीय रेसलर विनेश फोगाट ने कुश्ती को अलविदा कह दिया। उनके फाइनल मुकाबले में न खेल पाने की वजह से देश के लोग खासा निराश और चिंतित हैं। देश को ओलंपिक में उनसे गोल्ड मेडल की पूरी उम्मीद थी। लेकिन, इस घटना ने पूरे देश को मायूस कर दिया। देश के आम से लेकर खास लोगों की जुबान से घटना का जिक्र सुनने को मिल रहा है, लेकिन बिहार सरकार के खेल मंत्री इस पूरे मामले से अनभिज्ञ हैं। विनेश को लेकर बिहार के खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता का अजीबो-गरीब बयान सामने आया है। खेल मंत्रालय संभालने के बावजूद, उन्हें चैंपियन खिलाड़ी के बारे में कुछ नहीं पता। उन्हें यह तक नहीं पता कि विनेश किस राज्य से ताल्लुक रखती हैं? आप भी उनका बयान सुनकर हैरत में पड़ जाएंगे।

विनेश फोगाट के बार में नहीं जानते मंत्री जी

पत्रकारों से बातचीत के दौरान विनेश फोगाट के बारे में किए गए सवाल का बिहार के खेल मंत्री के पास कोई औचित्य जवाब नहीं था। तभी तो खेल मंत्री को पता नहीं की ओलंपिक से डिसक्वालिफाइड होने वाली चैंपियन खिलाड़ी विनेश फोगाट कहां की रहने वाली हैं? तभी तो मंत्री जी कह रहे हैं कि बिहार इस क्षेत्र में पीछे हो जाता है।

उन्होंने मजाकिया अंदाज में हंसते हुए कहा कि यह दुख का विषय है। उनके बयान से लग रहा है कि सुरेंद्र मेहता कहना चाह रहे हैं कि विनेश फोगाट बिहार की बेटी हैं, इसलिए बिहार इस क्षेत्र में पीछे हो जाता है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!