एनडीए की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकमोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 2026 में देश की जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों का परिसीमन अवश्य किया जाए। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के नेताओं की आपत्तियों के कारण यह महत्वपूर्ण कदम बार-बार टलता रहा है, जिससे बिहार जैसे राज्यों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उपेंद्र कुशवाहा ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि 1971 के बाद से अब तक परिसीमन नहीं हुआ है, जिससे गंभीर असंतुलन पैदा हो गया है।
RLM अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में दक्षिण के राज्यों से औसतन 21 लाख की आबादी पर एक सांसद भेजा जा रहा है, जबकि हिंदी भाषी राज्यों में यह आंकड़ा 31 लाख प्रति सांसद है। उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत के नेताओं का यह तर्क कि परिसीमन से उत्तर भारत को जनसंख्या वृद्धि का इनाम मिलेगा, पूर्णतः गलत और भ्रामक है। उनका दावा है कि 1971 तक दक्षिण भारत की जनसंख्या उत्तर भारत की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी थी, और तब उन्होंने इसका राजनीतिक लाभ उठाया।
निष्पक्ष परिसीमन की मांग
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि, अब जब बिहार जैसे राज्यों में जनसंख्या बढ़ रही है तो दक्षिण के राज्य व्यवधान पैदा कर रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि यदि नई जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होता है, तो बिहार को कम से कम 60 लोकसभा सीटें मिलेंगी, साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी इजाफा होगा। कुशवाहा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वो दक्षिण के राज्यों के राजनीतिकदबाव में न आए और जल्द से जल्द जनसंख्या के आधार पर निष्पक्ष परिसीमन कराए।
