पटना

...तो बिहार में नहीं लागू होगा वक्फ संशोधन विधेयक; तेजस्वी यादव ने बिहार चुनाव से पहले किया ये बड़ा वादा

Tejashwi Yadav on Waqf Amendment Bill: एक ओर देशभर में विपक्षी दलों के नेता वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करते नजर आए, तो वहीं दूसरी तरफ बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा वादा करते हुए ये ऐलान किया है कि हमारी सरकार बनी तो बिहार में वक्फ संशोधन विधेयक लागू नहीं होगा। आपको बताते हैं, उन्होंने क्या कुछ कहा है।

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तेजस्वी यादव। (फाइल फोटो)

Photo : IANS

तो क्या बिहार में वक्फ संशोधन अधिनियम लागू नहीं होगा? ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को वक्फ संशोधन विधेयक के संबंध में एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार बनी तो बिहार में वक्फ संशोधन विधेयक किसी कीमत पर लागू नहीं होगा और इसे कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।

'किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे वक्फ संशोधन विधेयक'

पटना में मीडिया से बातचीत ते दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल ने लोकसभा और राज्यसभा में अपनी बातें पूरी मजबूती के साथ रखी और कड़ा विरोध करके इसके खिलाफ वोट किया। उन्होंने कहा कि जो लोग मुसलमानों के हितैषी होने का ढोंग करते हैं, उनकी पोल खुल चुकी है। बिहार में जब हमारी सरकार बनेगी तो वक्फ संशोधन विधेयक को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे और इसे कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा। वक्फ संशोधन विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें संविधान के आर्टिकल 26 का उल्लंघन किया गया है। भाजपा और आरएसएस लगातार संविधान विरोधी कार्य कर रही है और देश के लोगों को बांटना चाहती है। इस तरह के अन्यायपूर्ण बिल के खिलाफ राजद कोर्ट में गया है। इसे लेकर सदन से सड़क और कोर्ट तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

'मुख्यमंत्री एक शब्द नहीं बोल रहे हैं और साध लिए हैं चुप्पी'

तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के उसूलों पर रहते हुए इस बिल के खिलाफ पूरी मजबूती से लालू यादव के नेतृत्व में इसका विरोध करती रहेगी और किसी भी कीमत पर देश के संविधान के खिलाफ जो कार्य किए जा रहे हैं, उसे आगे नहीं बढ़ने देगी।

उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री अचेत अवस्था में हैं। ये लोग विचारधारा की राजनीति नहीं बल्कि कहीं न कहीं भाजपा के पक्ष में खड़े होकर उनका विश्वास जीतने में लगे रहे। लेकिन, ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि मुसलमानों का हितैषी होने का ढोंग करने से कुछ नहीं होगा। जिस तरह से 65 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को भाजपा ने रुकवाया, उसके खिलाफ पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित, आदिवासी को दीर्घकालीन लाभ के लिए सोचना चाहिए और ऐसे मामलों में इस बात को समझना चाहिए कि भाजपा दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अतिपिछड़ा के विरोध की राजनीति करती है और उनके हक और अधिकार को रोकना चाहती है।

उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय वक्फ संशोधन विधेयक पर भी मुख्यमंत्री एक शब्द नहीं बोल रहे हैं और चुप्पी साध लिए हैं। मुख्यमंत्री का एक भी शब्द नहीं बोलना और महत्वपूर्ण विषयों पर चुप्पी से समझा जा सकता है कि सरकार कैसे चल रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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