पटना

Bhojpur News: आधी रात STF ने बोला कुख्यात बुटन चौधरी के घर धावा, AK-47 के साथ मिले हाईटेक हथियार; जानें और क्या-क्या मिला?

बिहार के भोजपुर जिले के कुख्यात इनामी बुटन चौधरी के घर पर एसटीएफ और पुलिस ने छापामारी कर कई आधुनिक हथियार बरामद किए हैं। हालांकि, दो लाख का इनामी बुटन पुलिस के हाथ नहीं लग सका।

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बुटन चौधरी के घर मिली एके-47

भोजपुर : जिले के उदवंतनगर थाना क्षेत्र स्थित बेलाउर गांव में कुख्यात इनामी बुटन चौधरी के घर पर एसटीएफ और जिला पुलिस ने संयुक्त छापेमारी की। छापेमारी के दौरान बुटन चौधरी के घर से कई हथियार बरामद किए गए। हालांकि, दो लाख का इनामी बुटन पुलिस के हाथ नहीं लग सका। रविवार की मध्य रात्रि में भोजपुर पुलिस के सहयोग से एसटीएफ की टीम ने छापेमारी कर गांव के मुखिया के पति उपेंद्र चौधरी को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर प्रतिबंधित हथियार एके-47, 4 मैगजीन, 43 कारतूस के साथ दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए।

मुखिया के पति ने खोले राज

बताया जा रहा है कि भोजपुर पुलिस अधीक्षक राज को सूचना मिली थी कि कुख्यात बुटन चौधरी के घर पर अत्याधुनिक हथियार एवं ग्रेनेड रखे हुए हैं, जिसके आधार पर पुलिस ने छापेमारी की। पुलिस ने बुटन चौधरी के भाई उपेंद्र चौधरी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। यह हथियार और ग्रेनेड कहां से आया पुलिस इसकी गहनता से छानबीन की जा रही है। उपेंद्र चौधरी मुखिया पति है, उसकी पत्नी उर्मिला देवी बेलाउर पंचायत की मुखिया है।

कुख्यात इनामी बुटन चौधरी के घर पर हुई छापेमारी में एके-47 राइफल के अलावा दो मैग्जीन, एके-47 का 43 कारतूस, दो हैंड ग्रेनेड , इंसास राइफल का दो मैगजीन समेत कुल 4 मैगजीन बरामद किया गया है। साल 2015 में भी कुख्यात बुटन चौधरी को मार्च महीने में पुलिस ने एक-47 के साथ गिरफ्तार किया था। बताया जाता है कि उदवंतनगर थाना क्षेत्र में कुख्यात बुटन चौधरी की तूती बोलती थी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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