Anand Mohan news : माफिया पर योगी सरकार के एक्शन का ये खौफ है कि उत्तर प्रदेश में आए दिन गैंगस्टर और बदमाश सरेंडर कर रहे हैं। संभल में एक गैंगस्टर ने हाथ में पोस्टर लेकर थाने में सरेंडर कर दिया। इस पोस्टर में लिखा हुआ था कि 'साहब मुझे गोली मत मारना, मैं गैंगस्टर का अपराधी हूं, साहब मुझे गिरफ्तार कर लो।' एक तरफ सीएम योगी यूपी में माफिया को मिट्टी में मिला रहे हैं। अतीक का खात्मा हो गया, मुख्तार जैसे माफिया बाहर आने से डर रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ बिहार में नीतीश कुमार का राज है, जहां सजायाफ्ता अपराधी को जेल से निकालने के लिए नियम तक बदल दिए जा रहे हैं। आज आनंद मोहन की जेल से रिहाई हो गई।
जातीय समीकरण की पूरी स्क्रिप्ट लिखी गई है
इस आनंद मोहन के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बहुत मेहनत की है, कानून में बदलाव किया है, सियासी समीकरण सेट किए हैं, 2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति बनाई है और पीएम मोदी को सत्ता से हटाने के लिए जातीय समीकरण की पूरी स्क्रिप्ट लिखी है। जेल से बाहर निकलने के बाद आनंद मोहन के लिए रोड शो किया गया। गाड़ियों का काफ़िला और लोगों की भीड़ आनंद मोहन को लेने के लिए सहरसा जेल के बाहर पहुंची थी। हालांकि भीड़ को आशंका की वजह से आनंद मोहन को सुबह करीब 7 बजे ही रिहा कर दिया था इसलिए रोड शो में आनंद मोहन के बेटे और विधायक चेतन आनंद और बेटी सुरभि आनंद शामिल हुईं।
पोस्टर पर लिखा 'आभार बिहार सरकार'
ऐसा माहौल तैयार किया गया था कि कोई क्रांतिकारी जेल से बाहर आया हो। आनंद मोहन के रोडशो में कैसे-कैसे पोस्टर लगाए गये वो भी देखिए इसमें लिखा था...'सुस्वागतम् शेर-ए- बिहार'। इस पोस्टर पर लिखा गया 'आभार बिहार सरकार' यानी नीतीश कुमार ने जिस तरह जैल मैनुएल में बदलाव करके आनंद मोहन की रिहा किया है उसके बदले में खुलेआम नीतीश कुमार को धन्यवाद किया गया।
- आनंद मोहन दो बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं।
- इन्हें बिहार मे बड़ा राजपूत चेहरा माना जाता है और नीतीश कुमार के पास फिलहाल कोई बड़ा राजपूत चेहरा नहीं है।
- बिहार में राजपूतों की आबादी करीब 8% है।
- बिहार की करीब 30 विधानसभा सीटों और 8 लोकसभा सीटों पर राजपूत वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
- 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने 5 राजपूतों को टिकट दिया था और ये सभी जीतकर लोकसभा पहुंचे थे।
- नीतीश कुमार आनंद मोहन की मदद से इसी समीकरण को बदलना चाहते हैं।
- हालांकि आनंद मोहन अभी चुनाव नहीं लड़ सकते लेकिन वोटर पर असर डालने के लिए उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
- आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और बेटे चेतन आनंद अभी RJD में हैं।
- चेतन आनंद RJD के विधायक भी हैं।
नीतीश कुमार इस कोशिश में हैं कि 2024 में पिछड़ा वर्ग, मुसलमान और सवर्ण वोटर का साथ मिल जाए तो वो पीएम मोदी को चुनौती दे सकते हैं इसलिए आजकल देशभर में घूम-घूमकर विपक्ष के नेताओं से मिल रहे हैं। आरजेडी और जेडीयू के पास वर्तमान में कोई बड़ा राजपूत चेहरा नहीं है, ऐसे में महागठबंधन इसकी भरपाई भी आनंद के सहारे करने की तैयारी में है, लेकिन सवाल है कि आनंद मोहन क्या कमाल कर पाएंगे?
2024 चुनाव से पहले नीतीश कुमार का आनंद मोहन दांव
बिहार में राजपूत एक प्रभावशाली जाति है। राजपूतों की आबादी बिहार में करीब 8% है। राज्य की करीब 30 विधानसभा सीटों और 8 लोकसभा सीटों पर राजपूत हार या जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने 5 राजपूतों को टिकट दिया था और ये सभी जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। JDU और RJD सवर्ण जातियों तक पहुंच बनाकर अपने OBC केंद्रित वोटर बेस को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। आनंद मोहन सिंह इसका जरिया हैं।बिहार में राजपूत वोटों के समीकरण की वजह से आनंद मोहन की रिहाई पर BJP ने खामोशी अख्तियार कर ली है उनके पक्ष में खड़ी है। देखना दिलचस्प होगा कि 2024 चुनाव से पहले नीतीश सरकार का ये दांव कितना कारगर साबित होगा। आनंद मोहन की वकील कह रही हैं कि ये नीतीश कुमार की तरफ से आनंद मोहन को तोहफा है। सही बात है आजीवन कारावास काट रहे अपराधी के लिए जेल से बाहर आना बहुत बड़ा गिफ्ट है।
- 5 दिसंबर 1994 को DM जी कृष्णैया की हत्या हुई।
- 3 अक्टूबर 2007 में आनंद मोहन सहित 3 लोग को फांसी की सज़ा सुनाई।
- दिसंबर 2008 को हाईकोर्ट ने आनंद मोहन की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया।
- इसके बाद जुलाई 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही बताया।
- इसके बाद नीतीश कुमार ने अपनी कलम उठाई और कार्ट के उम्रकैद वाली सज़ा को बदलने का जुगाड़ निकाला।
- नीतीश सरकार ने बिहार जेल मैनुअल, 2012 के नियम 484 (1) में बदलाव किया।
इस नियम के तहत अगर ड्यूटी पर मौजूद सरकारी आदमी की हत्या होती है तो अपराधी की रिहाई नहीं होगी और वो सारी उम्र जेल में ही रहेगा।
लेकिन नीतीश कुमार सरकार ने इस नियम में बदलाव किया और इस नियम में से 5 शब्द हटा दिये और वो शब्द थे यानी ऑन ड्यूटी सरकारी कर्मचारी की हत्या वाली धारा हटा दी। इससे आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता क्लियर हो गया और वो बाहर आ गया।
