Patna News: जन सुराज अभियान के सूत्रधार और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने शनिवार को पटना स्थित हज भवन में मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ संवाद करते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी को हराना मुश्किल नहीं है, अगर गांधी, अंबेडकर, लोहिया और वामपंथी विचारधारा में विश्वास रखने वाले हिंदू और मुसलमान एकजुट हो जाएं।
प्रशांत किशोर ने कहा कि भारत के 60 प्रतिशत हिंदू अभी भी भाजपा के साथ नहीं हैं, और यह वर्ग ऐसा है जो आजादी की लड़ाई के मूल्यों में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा, "अगर यह 60 फीसदी जनता और मुस्लिम समाज साथ आ जाएं, तो बीजेपी का गणित बदल जाएगा। एम-वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण केवल 30 है, जबकि जन सुराज का नया समीकरण होगा 60 और बीजेपी रह जाएगी 40 पर।"
"गांधी और अंबेडकर के अनुयायी बीजेपी के साथ नहीं"
प्रशांत किशोर ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी, गांधी, अंबेडकर, लोहिया और वामपंथी विचारधारा के अनुयायी, वही आज भी देश की आत्मा को बचाए हुए हैं। उन्होंने कहा, "भाजपाई तो आजादी की लड़ाई में थे ही नहीं, फिर आज वे देश की आत्मा की बात कैसे कर सकते हैं?"
"2027 में ही समाधान, 2029 तक इंतजार नहीं"
मुस्लिम समाज को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते हुए किशोर ने कहा कि अगर मुस्लिम समाज जन सुराज के साथ आता है तो 2027 में ही उनकी राजनीतिक चिंताओं का हल निकाल दिया जाएगा, 2029 तक इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने आगे कहा कि बिहार से बदलाव की शुरुआत होगी और फिर यह लड़ाई उत्तर प्रदेश में लड़ी जाएगी।
पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा, "वहां मुस्लिम समाज ने हमारी बात मानी, देखिए आज वहां यूसीसी (यूनिफॉर्म सिविल कोड) और एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) जैसे मुद्दे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। यही काम हम बिहार और यूपी में भी करेंगे।" प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने 2014 में नरेंद्र मोदी को चुनाव जिताने में भी योगदान दिया था। "लेकिन जब महसूस हुआ कि यह रास्ता देश को आगे नहीं ले जाएगा, तो हमने बिहार से जन सुराज की शुरुआत की और भाजपा को 55 सीटों पर समेट दिया।"
3,000 से अधिक मुस्लिम बुद्धिजीवी पहुंचे, 250 ने ली सदस्यता
हज भवन में आयोजित संवाद कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न हिस्सों से आए 3,000 से अधिक मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। इनमें 50 से अधिक प्रोफेसर, शिक्षक और समाजसेवी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान लगभग 250 लोगों ने जन सुराज की सदस्यता भी ली। किशोर ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा, "जैसे आप कहते हैं कि आपने आजादी की लड़ाई में खून-पसीना बहाया, वैसे ही जब बिहार के बदलाव का इतिहास लिखा जाएगा, तो उसमें यह भी दर्ज होना चाहिए कि मुस्लिम समाज ने इसमें सक्रिय भागीदारी की। यह सिर्फ सीट लेने की बात नहीं है, यह बदलाव में साझेदारी की बात है।"
