पटना

बिहार में साल 2005 से 2025 तक 500 फीसदी क्राइम बढ़े; कांग्रेस ने सरकार पर लगाए सनसनीखेज आरोप

Crime in Bihar: कांग्रेस ने नीतीश कुमार की सरकार को घेरते हुए उनके कार्यकाल पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दल ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि बिहार में 2005 से 2025 तक 500 प्रतिशत अपराध बढ़े। कांग्रेस ने पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि बिहार में प्रतिदिन 953 जघन्य अपराध होते हैं।

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कांग्रेस का दावा- बिहार में पिछले 20 सालों में 500 प्रतिशत अपराध बढ़े।

Congress Slams CM Nitish Kumar: बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्ष मुद्दे तय करने में जुटा है। विपक्ष सरकार को विभिन्न विषयों पर घेर रहा है। इस बीच, कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को जोरदार तरीके से घेरा।

बिहार में पिछले 20 सालों में 500 प्रतिशत अपराध बढ़े- कांग्रेस

कांग्रेस के पूर्व सांसद अजय कुमार ने दावा करते हुए कहा कि 2005 से लेकर 2025 तक बिहार में आपराधिक घटनाओं में 500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने बिहार की एनडीए सरकार को अपराध का जनक बताया और कहा कि इन दो राजनीतिक दलों ने मिलकर बिहार को बर्बाद कर दिया। नीतीश कुमार ने अपने 20 वर्षों के शासन में बिहार को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया।

उन्होंने पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि बिहार में प्रतिदिन 953 जघन्य अपराध होते हैं। इस सरकार के जाने तक आंकड़ा 1,000 तक पहुंचने की उम्मीद है। महिलाओं और बच्चों के ऊपर भी अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं।

'पुलिस ही सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी की बात भी क्यों होगी'

कांग्रेस नेता ने पुलिस विभाग में खाली पदों का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस के करीब एक लाख पद रिक्त हैं। मार्च महीने में प्रदेश के दो स्थानों में एएसआई की हत्या कर दी गई। अब समझा जा सकता है कि जब इस प्रदेश में पुलिस ही सुरक्षित नहीं है तो आम आदमी की बात भी क्यों होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति पहले अपराध नहीं होते थे। न ही बच्चों के खिलाफ अपराध थे, लेकिन आज अपराध का बोलबाला है। दलित महिलाओं की हालत चिंताजनक है।

बिहार को अंधेरे में धकेल रहे हैं नीतीश कुमार; कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस ने पूछा कि आखिर क्या कारण है कि मुख्यमंत्री के हाथ से पूरी तरह से शासन छूट रहा है? नीतीश कुमार अब पुराने वाले नीतीश कुमार नहीं रहे। अब वह सिर्फ बिहार को धकेल रहे हैं अपनी कुर्सी बचाने के लिए। सत्ता में आने के लिए बिहार को अंधेरे में धकेल रहे हैं, जो अच्छी बात नहीं है।

उन्होंने कांग्रेसशासित राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब हम लोगों को मौका दीजिए, हम लोग निराश नहीं करेंगे। उन्होंने ऑर्गेनाइज्ड क्राइम पर कहा कि क्राइम तो क्राइम है, ऑर्गेनाइज्ड क्राइम क्या होता है?

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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