पटना

पटना की बेउर जेल में भारी बवाल, अनंत सिंह के समर्थकों और कैदियों के बीच मारपीट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 16, 2023, 10:00 AM IST

Bihar News: बेउर जेल में बंद पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह और अन्य कैदियों के बीच बहस हो गई, मामला इतना बढ़ा कि मारपीट तक की नौबत आई, जिसके बाद जेल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया।

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Beur Jail Clash

Photo : iStock

Bihar News: बिहार की राजधानी पटना से बड़ी खबर सामने आई है। यहां की बेउर जेल में कैदियों के बीच जमकर मारपीट की सूचना है। जानकारी के मुताबिक, जेल में बंद पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह और अन्य कैदियों के बीच बहस हो गई, मामला इतना बढ़ा कि मारपीट तक की नौबत आई, जिसके बाद जेल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि दोनों गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसमें कुछ कैदी घायल हुए हैं। मामला इतना बढ़ गया कि जेल के सायरन भी बज उठे, इसके बाद मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने दोनों गुटों को शांत कराया। बेउर जेल में भारी बवाल की सूचना के बाद वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं।

एक वार्ड का दरवाजा खोले जाने को लेकर हुआ बवाल

जानकारी के मुताबिक, एक वार्ड का दरवाजा खोले जाने को लेकर दोनों गुटों में बवाल हो गया और नौबत मारपीट की आ गई। अधिकारी अभी भी जेल में मौजूद हैं और संबंधित मामले में कार्रवाई कर रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि जेल में हुई मारपीट में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। बताया जा रहा है कि बेउर जेल में अक्सर कैदियों के बीच मारपीट की खबरें सामने आती रहती हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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