पटना

वक्फ संशोधन विधेयक क्यों जरूरी था? बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने बताई ये जरूरी बात

Arif Mohammad Khan on Waqf Board: बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा है कि वक्फ बोर्ड में सुधार की जरूरत है, विधेयक पारित होना इस दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसा कहा जाता है कि वक्फ की संपत्ति अल्लाह की है... लेकिन इसके विपरीत बोर्ड के लोग मुकदमे लड़ने में व्यस्त हैं।

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बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान।

Waqf Amendment Bill: बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शनिवार को कहा कि वक्फ बोर्ड के कामकाज में काफी सुधार की जरूरत है और संसद द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित करने से यह संभव हो पाएगा। बिहार के पटना में एक समारोह के इतर पत्रकारों से बात करते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि पटना में कई वक्फ बोर्ड हैं लेकिन उनमें से कोई भी अनाथालय या अस्पताल का संचालन नहीं करता है।

'वक्फ बोर्ड के कामकाज में काफी सुधार की जरूरत है'

आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, 'वक्फ बोर्ड के कामकाज में काफी सुधार की जरूरत है। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक इस दिशा में एक ठोस कदम है।' राज्यपाल ने आगे कहा, 'ऐसा कहा जाता है कि वक्फ की संपत्ति अल्लाह की है... लेकिन इसके विपरीत बोर्ड के लोग मुकदमे लड़ने में व्यस्त हैं।'

'वक्फ संपत्तियों का लाभ उठा रहे हैं बोर्ड के सदस्यों के रिश्तेदार'

राज्यपाल ने दावा किया कि बोर्ड के सदस्यों के रिश्तेदार वक्फ संपत्तियों का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यह गैर-इस्लामी है।' उन्होंने कहा कि बोर्ड में बैठे लोगों को गरीबों की बेहतरी की कोई चिंता नहीं है।

उत्तर प्रदेश में वक्फ मंत्रालय के पूर्व मंत्री के रूप में अपने अनुभव को साझा करते हुए बिहार के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, 'वहां भी बोर्ड के सदस्य भूमि और संपत्ति विवादों से संबंधित मामलों के मुकदमे लड़ने में व्यस्त थे। मैं एक बार फिर दोहरा रहा हूं कि वक्फ बोर्ड बेसहारा लोगों के कल्याण के लिए हैं।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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