पटना

'कौन लिखा है? चेंज करवाइये'... अंग्रेजी में बोर्ड देख भड़के नीतीश कुमार, लगा दी अधिकारियों की क्लास

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 27, 2023, 03:44 PM IST

Bihar News: बांका में डिजिटल लाइब्रेरी का अंग्रेजी में बोर्ड देखते ही नीतीश कुमार ने अधिकारियों की क्लास लगानी शुरू कर दी। उन्होंने पहले तो कहा कि इसे कौन लिखा है? बुलाइए उसको। इसके बाद जब डीएम व अन्य अधिकारी मुख्यमंत्री के पास पहुंचे तो उन्होंने साफ लहजे में कहा कि आप लोग हिंदी के महत्व को ही खत्म कर रहे हैं, यह हमारी भाषा है।

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नीतीश कुमार

Photo : ANI

Bihar News: मातृभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए हर साल हिंदी दिवस मनाया जाता है। बीते 14 सितंबर को भी देशभर में हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। कई संगोष्ठियां और कार्यक्रम हुए। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कसमें भी खाई गईं। लेकिन ये सभी प्रयास ऐसे कार्यक्रमों तक ही सीमिति हैं, इसका मजमून बुधवार को बिहार के बांका में दिखाई दिया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यहां डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन करने पहुंचे।

लाइब्रेरी के बोर्ड पर अंग्रेजी में लिखा हुआ था, जिसे देख सीएम नीतीश कुमार भड़क गए। वे इतना गुस्सा हुए कि अधिकारियों को बुलाकर वहीं पर क्लास लगा दी। इतना ही नहीं नीतीश कुमार ने उसे तत्काल बदलवाने का फरमान भी सुना दिया। सीएम का गुस्सा देख अधिकारी भी सन्न रह गए और हां में हां मिलाते नजर आए। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

कौन लिखा है? बुलाइये उसको

नीतीश कुमार के गुस्से का आलम यह था कि अंग्रेजी को बोर्ड देखते ही उन्होंने क्लास लगानी शुरू कर दी। उन्होंने पहले तो कहा कि इसे कौन लिखा है? बुलाइए उसको। इसके बाद जब डीएम व अन्य अधिकारी मुख्यमंत्री के पास पहुंचे तो उन्होंने साफ लहजे में कहा कि आप लोग हिंदी के महत्व को ही खत्म कर रहे हैं, यह हमारी भाषा है। सीएम ने कहा कि हम लोग हिंदी में पढ़े हैं। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हिंदी को बढ़ाने के लिए हम लोग काम कर रहे हैं और यहां सभी जगहों पर अंग्रेजी में ही लिखावट है।

पहले भी सामने आ चुका है नीतीश का हिंदी प्रेम

यह पहला मौका नहीं है जब नीतीश कुमार का हिंदी प्रेम सामने आया हो। इससे पहले मार्च, 2023 में भी बिहार विधान परिषद में बजट सत्र के दौरान नीतीश कुमार अंग्रेजी देख नाराज हुए थे। यहां लगी एलईडी स्क्रीन पर भी अंग्रेजी में ही डिस्प्ले हो रहा था, जिसे देख नीतीश कुमार ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने विधान परिषद के सभापति से कहा था कि ये सब अंग्रेजी में क्या लिखवा दिए हैं? ई सबको सुधरवाइये। हिंदी को एकदम खत्मे कर दीजिएगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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