पटना

Bihar Chunav: 2025 की जंग से पहले शाह का मास्टर प्लान, शाहाबाद–मगध को बनाना है जीत का दरवाजा

बिहार चुनाव से पहले बीजेपी–एनडीए का फोकस शाहाबाद और मगध पर है। 2020 और 2024 में यहां करारी हार के बाद शाह ने बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने का टास्क दिया। विपक्ष का दावा है कि महागठबंधन की पकड़ मजबूत है। अब चुनावी फैसले पटना से ही होंगे।

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अमित शाह ने बिहार चुनाव से पहले शाहाबाद और मगध जीतना का प्लान बनाया (Photo- ANI)

Bihar Chunav News: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और एनडीए ने अपनी पूरी नज़र उन इलाकों पर गड़ा दी है, जहाँ अब तक उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार लड़ाई आधी-अधूरी नहीं छोड़ी जाएगी। शाहाबाद और मगध को जीतना पार्टी के लिए न सिर्फ़ सम्मान का सवाल है, बल्कि सत्ता तक पहुँचने का दरवाज़ा भी है।

रोहतास से बेगूसराय तक बिगुल

अमित शाह ने हाल ही में रोहतास और बेगूसराय से चुनावी अभियान का बिगुल बजाया। दो बड़े आयोजनों में उन्होंने लगभग पाँच हज़ार कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया। बैठकों में शाह ने बूथ स्तर की तैयारी का बारीकी से जायज़ा लिया और कार्यकर्ताओं को यह संदेश दिया कि जीत तभी संभव है जब हर घर तक पार्टी का एजेंडा पहुँचाया जाए। इसके साथ ही संभावित प्रत्याशियों की लोकप्रियता पर भी स्थानीय नेताओं से राय ली गई।

हार का हिसाब, जीत का संकल्प

बीजेपी के सामने शाहाबाद और मगध की सबसे बड़ी चुनौती हालिया चुनावी नतीजों से साफ झलकती है। 2020 के विधानसभा चुनाव में 22 सीटों वाले इस क्षेत्र से पार्टी को सिर्फ़ दो सीटें मिलीं। 2024 लोकसभा चुनाव में तो हालात और भी खराब रहे, चारों सीटें विपक्ष के खाते में चली गईं। आरा से आरके सिंह और काराकाट से उपेंद्र कुशवाहा जैसे बड़े चेहरे भी हार गए। इन नतीजों ने बीजेपी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर 2025 में बाज़ी पलटनी है तो शाहाबाद–मगध को जीतना अनिवार्य होगा।

संगठन से सियासत साधने की रणनीति

एनडीए का मानना है कि शाहाबाद और मगध में मजबूत पकड़ के बिना बहुमत पाना बेहद मुश्किल है। इसी वजह से अमित शाह ने बूथ से लेकर जिला स्तर तक संगठन को मजबूत करने का टास्क दिया है। प्रदेश कार्यसमिति में 105 नए नेताओं को शामिल किया गया है और आधा दर्जन नेताओं को आयोगों व कमेटियों में जगह दी गई है। यह कदम साफ संकेत देता है कि पार्टी अब पुराने ढर्रे से हटकर नई टीम और नए प्रयोगों के सहारे चुनाव मैदान में उतरने जा रही है।

विपक्ष का पलटवार

विपक्षी दल एनडीए के इन प्रयासों को लेकर ज्यादा आश्वस्त नहीं हैं। आरजेडी और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चाहे अमित शाह कितनी भी मेहनत कर लें, शाहाबाद और मगध की राजनीति में वाम दलों और महागठबंधन की पकड़ बेहद मजबूत है। विपक्ष का तर्क है कि इन इलाकों में जातीय समीकरण और जमीनी नेटवर्क एनडीए के लिए जीत आसान नहीं बनने देंगे। उनका दावा है कि शाह की रणनीति कागज़ पर मजबूत दिख सकती है, लेकिन ज़मीन पर असर डालना उतना आसान नहीं होगा।

अब पटना बनेगा कमान केंद्र

एनडीए ने इस बार एक बड़ा फैसला भी लिया है। बिहार चुनाव से जुड़े तमाम अहम निर्णय अब दिल्ली में नहीं, बल्कि पटना में ही होंगे। सीट शेयरिंग, टिकट बंटवारा और रणनीति जैसी सारी कवायद यहीं पर तय होगी। दिल्ली दौड़ने की ज़रूरत नेताओं को नहीं पड़ेगी। खुद गृह मंत्री अमित शाह भी चुनाव के दौरान पटना में डेरा डालकर चुनावी तैयारियों की कमान संभालेंगे। यह स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी बिहार को केवल एक राज्यीय चुनाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाली बड़ी जंग मान रही है।

Himanshu Tiwari
हिमांशु तिवारीauthor

हिमांशु तिवारी एक पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का 16 साल का अनुभव है। मैंने अपना करियर क्राइम रिपोर्टर के रूप में शुरू किया था लेकिन बाद में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में शिफ्ट हो गया। पिछले 12 से अधिक वर्षों से बीजेपी, आरएसएस को कवर कर रहे हैं, कुछ आम चुनावों और कई विधानसभा चुनावों की सटीक रिपोर्टिंग भी की है। "सारी दुनिया एक मंच है" और इसलिए रंगमंच और नाटक लिखने में गहरी रुचि है।

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