पटना के फुलवारीशरीफ थाने में रिश्वतखोरी का गंभीर मामला सामने आया है। यहां मादक पदार्थ की खरीद-बिक्री के आरोप में की गई छापेमारी के दौरान पकड़े गए दो अन्य युवकों को कथित तौर पर पैसे लेकर छोड़ने का आरोप पुलिसकर्मियों पर लगा है। मामले में शुरुआती जांच के बाद पांच पुलिस अवर निरीक्षकों, एक प्रशिक्षु पुलिस अवर निरीक्षक और दो सिपाहियों समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
आरोप है कि दोनों युवकों को प्राथमिकी में नामजद किए बिना पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया। बाद में रिश्वत की रकम के लेन-देन और बंटवारे को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच ही विवाद हो गया। इसी कहासुनी के बाद मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू हुई।
मादक पदार्थ के साथ एक युवक गिरफ्तार, दो अन्य को भी थाने लाई थी पुलिस
नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) कार्यालय ने इस मामवे को लेकर बयान भी जारी किया है। इसमें बताया गया है कि 26 अक्टूबर को फुलवारीशरीफ थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मादक पदार्थ की खरीद-बिक्री के खिलाफ छापेमारी की थी। इस दौरान आकिब खान उर्फ मो. साकिब खान (32) को गिरफ्तार किया गया था। जोकि नया टोला पठान टोली के वार्ड नंबर-24 का रहने वाला है।पुलिस ने उसके पास से नशीले पदार्थ बरामद करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस कार्रवाई को लेकर फुलवारीशरीफ थाना कांड संख्या 1867/26 दर्ज किया गया था। इसमें एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं।
हालांकि, छापेमारी के दौरान आकिब खान के साथ मो. आफताब आलम और मो. एहसान नाम के दो अन्य युवकों को भी पकड़कर थाने लाया गया था। जांच में सामने आया कि इन दोनों के नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं किए गए। इतना ही नहीं, वरिष्ठ अधिकारियों को भी उनकी हिरासत में लिए जाने की जानकारी नहीं दी गई।
पैसे लेकर पीआर बॉन्ड पर छोड़ने का आरोप
आरोप है कि छापेमारी में शामिल पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों ने दोनों युवकों को छोड़ने के बदले मोटी रकम ली। इसके बाद उन्हें पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया। मामला यहीं तक नहीं रुका। बाद में रिश्वतखोरी की रकम को लेकर लेकर पुलिसकर्मियों के बीच में ही विवाद हो गया। फिर पैसों के बंटवारे को लेकर हुए इस विवाद की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची। इसके बाद पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए गए। शुरुआती जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
पांच दरोगा, एक प्रशिक्षु दरोगा और दो सिपाही निलंबित
इस मामले में प्रथम दृष्टया आठ पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। इनमें एएसएचओ दिवाकर प्रसाद,दारोगा नारद मुनी सिंह,दारोगा रितेश कुमार,दारोगा आकाश कुमार,दारोगा पवन कुमार,पीटीसी-1118 साबिर आलम,सिपाही-8949 आनंद राज,सिपाही-9035 शुभम कुमार शामिल हैं।
ये सभी फुलवारीशरीफ थाने में तैनात थे। मामले की जांच के दौरान इनकी भूमिका सामने आने के बाद सभी को निलंबित कर दिया गया है। इनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू की गई है।
एएसपी कर रहे जांच, स्थानीय लोगों की भूमिका भी संदिग्ध
मामले की जांच सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी), फुलवारीशरीफ को सौंपी गई है। पुलिस की ओर से जारी जानकारी में यह भी कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण में कुछ स्थानीय लोगों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
