कोलकाता में इस साल गणेश पूजा के दौरान एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स का पंडाल खास चर्चा में है। यहां ‘परिवर्तन—एक विकसित बंगाल की ओर’ थीम पर पंडाल तैयार किया गया है। प्रसिद्ध कलाकार मिंटू पाल की परिकल्पना पर आधारित इस पंडाल में 11 फीट ऊंची भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। सफेद कुर्ते और नारंगी पगड़ी में सजे गणेश जी को राजसी स्वरूप दिया गया है, जो श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
इस गणेश पूजा पंडाल की सबसे खास प्रस्तुति 10×10 फीट की 3D वॉल है। इसमें बंगाल की स्थिति को दो अलग-अलग हिस्सों में दर्शाया गया है। एक हिस्से को ‘4 मई से पहले’ और दूसरे को ‘4 मई के बाद’ के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। आयोजकों ने इस कलात्मक प्रस्तुति के जरिए बंगाल में बदलाव और विकास की अपनी परिकल्पना को सामने रखने की कोशिश की है। 3D वॉल पंडाल की थीम को समझाने के साथ इसे देखने आने वाले लोगों के लिए आकर्षण भी बढ़ा रही है।
3D वॉल के पहले हिस्से में बंगाल से जुड़े कई चर्चित घटनाक्रमों और मुद्दों को दर्शाया गया है। इसमें मेसी के कोलकाता दौरे के दौरान पैदा हुई अव्यवस्था, आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े मामले में ‘अभया’ के लिए न्याय की मांग, बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने और गो-तस्करी जैसे विषय शामिल हैं। आयोजकों ने इन घटनाओं को अपनी थीम के पहले हिस्से में जगह देकर यह दिखाने की कोशिश की है कि उनके नजरिए में बदलाव से पहले बंगाल के सामने किस तरह की चुनौतियां थीं।
पंडाल की दूसरी तरफ विकास से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट और बदलाव प्रदर्शित किए गए हैं। इसमें नई दिल्ली–न्यू जलपाईगुड़ी बुलेट ट्रेन, चिंगड़ीहाटा में रुके मेट्रो वायाडक्ट के गैप का पूरा होना, नए उद्योगों की स्थापना और औद्योगिक विकास को प्रमुखता दी गई है। इसके अलावा अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई को भी इस हिस्से में दिखाया गया है। आयोजकों के मुताबिक, यह हिस्सा बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक बुनियादी ढांचे और विकास की दिशा में आगे बढ़ते बंगाल की तस्वीर पेश करता है।
आयोजकों का कहना है कि उनके लिए ‘परिवर्तन’ सिर्फ परिस्थितियों में बदलाव नहीं, बल्कि बंगाल की दिशा, सोच और संभावनाओं में बदलाव का प्रतीक है। पंडाल के जरिए बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार के अवसर, औद्योगिक विकास, नियोजित शहरीकरण और मजबूत शासन का संदेश देने की कोशिश की गई है। हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के निवासियों के अनुसार, इस बार गणेश चतुर्थी को आस्था और एकजुटता के उत्सव के साथ ऐसे बंगाल की आकांक्षा से जोड़ा गया है, जो अधिक प्रगतिशील, सुरक्षित, आत्मविश्वासी और समृद्ध हो।