नोएडा

Noida: दलित प्रेरणा स्थल जा रहे 34 किसान हिरासत में लिए गए, पीड़ित परिवारों का आरोप- 'जबरन दरवाजा तोड़कर उठा ले गई पुलिस'

Farmers Protest: किसान नेताओं के परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए वीडियो जारी किया है। उन्होंने बताया कि बीती देर रात उनके घर के दरवाजे तोड़े गए और उन्हें गिरफ्तार किया गया। उधर, पुलिस का कहना है कि उसने 34 किसानों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है।

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किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर नोएडा में बढ़ाई गई सुरक्षा।

Photo : ANI

Farmers Protest: उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने प्रदर्शनरत किसानों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार देर रात 34 किसानों को हिरासत में लिया गया है। ये किसान बिना अनुमति के नोएडा में जीरो पॉइंट से राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया, जिसके बाद सभी का जेल भेज दिया गया। देर रात जिन किसानों को हिरासत में लिया गया, उनमें किसान नेता सुधीर खलीफा भी शामिल हैं।

वहीं, किसानों ने आरोप लगाया है कि पुलिस बीती रात उनके घर के दरवाजे तोड़कर उन्हें जबरन ले गई। किसान नेताओं के परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए वीडियो जारी किया है। उन्होंने बताया कि बीती देर रात उनके घर के दरवाजे तोड़े गए और उन्हें गिरफ्तार किया गया। किसान नेता रूपेश ने भी अपना देर रात एक वीडियो जारी कर किसानों से गुरुवार दोपहर 12 बजे तक फिर जीरो पॉइंट पहुंचने का आह्वान किया है।

किसानों के साथ हुआ विश्वासघात

रूपेश ने अपने जारी किए गए वीडियो में किसान नेताओं के साथ विश्वासघात की बात कही है। उन्होंने बताया है कि कुछ किसानों को दोबारा देर रात हिरासत में लिया गया है। उनका कहा है कि इस समय आंदोलन अपने चरम पर है और सरकार इसे दबाना चाहती है। इसलिए सभी किसानों को इस आंदोलन को सफल बनाना होगा। उन्होंने किसानों से आज फिर 12 बजे जीरो पॉइंट पर इकट्ठा होने का आह्वान किया है।

कई किसान परिवारों ने शेयर किया वीडियो

इसके अलावा कई किसान नेताओं के परिवारों ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर अपना दर्द बताया। उन्होंने कहा है कि बीती देर रात घर में जबरन पुलिस वाले घुस गए और दरवाजा तोड़कर गिरफ्तार कर ले गए। उन्होंने यह भी बताया गया है कि कमरे का दरवाजा जब नहीं खुला तो उसे तोड़ दिया और किसान नेता को घर से गिरफ्तार कर ले गए। उन्होंने आरोप लगाया गया कि पुलिस किसान नेता जतन यादव को घर से उठा ले गई। घर में लगे विंडो एसी भी तोड़ दिए। वीडियो सामने आने के बाद किसानों में रोष बना हुआ है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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