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Noida Budget 2025-26: नोएडा को मिला भारी भरकम बजट, 81 गांवों की चमकेगी किस्मत; इन प्रस्तावों पर लगी मुहर

Noida Budget 2025-26: नोएडा प्राधिकरण ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 8000 करोड़ रुपये का विशाल बजट पेश किया। इस बजट में 1300 करोड़ रुपये का निवेश सिविल कंस्ट्रक्शन और 100 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास पर किया जाएगा

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नोएडा प्राधिकरण

Noida Budget 2025-26: नोएडा प्राधिकरण का 2025-26 का बजट लगभग 8000 करोड़ रुपए होगा। इसमें से सिविल निर्माण कार्यों के लिए 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबिक ग्रामीण विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। वित्तीय बजट बैठक में पांच प्रमुख प्रस्ताव शामिल किए जा सकते हैं। नए नोएडा के मुआवजा दर को भी बजट में जोड़ा गया है। प्रस्तावों की समीक्षा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के समक्ष किया गया। फाइनल प्रस्ताव को बोर्ड में लाया गया। कमर्शियल और इंडस्ट्रियल विभाग से स्कीम ब्रोशर पेश किया जाएगा।

81 गांवों का होगा विकास

इस बजट में इंडस्ट्रियल इंस्टीट्यूशन और आवासीय दर बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया। कमर्शियल में एंटरटेनमेंट सिटी का प्रस्ताव प्रस्तुत गया। मुख्य सचिव मनोज सिंह और अमिताभ कांत की कमेटी की बैठकों में रजिस्ट्री की स्थिति पर चर्चा हुई। यूनिफाइड पॉलिसी में आवश्यक बदलावों पर चर्चा की गई। बिल्डर के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने पर विचार किया जाएगा। किसानों को जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजे की दर निर्धारित करने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया। ग्रामीण विकास के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट 81 गांवों के विकास पर खर्च होंगे।

स्कीम ब्रोशर पेश

नोएडा के मुआवजा दर का समावेश भी होगा। कमर्शियल और इंडस्ट्रियल विभागों से स्कीम ब्रोशर पेश किया जाएगा और एंटरटेनमेंट सिटी का प्रस्ताव भी शामिल होगा। किसानों के लिए मुआवजे की दर भी निर्धारित की जाएगी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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