Abhijit Dipke: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन अब और उग्र हो गया है। आंदोलन के 32वें दिन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बातचीत के नाम पर सरकार ने सिर्फ उनका समय बर्बाद किया है। अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर समर्थकों को संबोधित करते हुए सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक के बारे में की दावे किए।
मोबाइल जब्त किए
दिपके का आरोप है कि बातचीत के लिए बुलाकर उनके प्रतिनिधियों के मोबाइल फोन छीन लिए गए। CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को एक तरह से जेपी नड्डा के आवास पर 'हाउस अरेस्ट' जैसी स्थिति में 5 घंटे तक बिठाकर रखा गया। दिपके ने कहा, पूरा प्लान टीम को बिखेरने का था, ताकि जब बाहर अराजकता (पुलिस कार्रवाई) हो, तो संभालने वाला कोई न हो। एक तरफ आप बातचीत का ढोंग करते हैं, दूसरी तरफ छात्रों पर लाठियां भांजते हैं।
क्या हुई थी जेपी नड्डा के साथ बैठक में?
सोमवार को आंदोलनकारियों के 'संसद चलो' मार्च को रोकने के बाद सरकार और CJP के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी। CJP के प्रतिनिधियों ने जेपी नड्डा को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग सबसे प्रमुख है। जेपी नड्डा ने आश्वासन दिया है कि वह इस मुद्दे पर सरकार के शीर्ष नेतृत्व के साथ आंतरिक चर्चा करेंगे। हालांकि, सरकार की तरफ से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
अनशन तोड़ने वाले थे वांगचुक
इस आंदोलन का एक और सबसे चिंताजनक पहलू पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन है, जो 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं। उन्हें 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था और तब से उनका अनशन जारी है। दिपके ने कहा, सोनम वांगचुक कल अपना अनशन समाप्त करने वाले थे। हमने बड़ी मुश्किल से उन्हें समझाया था। हमने उनसे आग्रह किया कि उनका जीवन इस देश के लिए बहुत कीमती है और उन्हें अपना अनशन समाप्त कर देना चाहिए। वे किसी तरह मान भी गए थे, लेकिन पुलिस की बर्बरता देखकर उन्होंने अपना अनशन जारी रखा है और यह बहुत गंभीर बात है।
सोनम वांगचुक के 'अंग हो सकते हैं डैमेज'
दिपके ने चेतावनी दी कि वांगचुक पिछले 4 दिनों से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों के मुताबिक अगले 3-4 दिनों में उनके अंग (Organs) डैमेज हो सकते हैं। दिपके ने कहा कि वांगचुक का लगातार अनशन गंभीर चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने आगे कहा, उनका शरीर 20-21 दिनों तक उपवास सहन कर सकता है। उसके बाद उनकी जान को खतरा है। डॉक्टरों ने कहा था कि तीन-चार दिनों में उनके अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्हें लाए हुए चार दिन हो चुके हैं। हम नहीं चाहते थे कि उनका उपवास लंबा चले।
"धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही होगा!"
CJP नेता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पुलिस द्वारा टेंट हटाए जाने के बावजूद जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जुटी हुई है और वे प्रदर्शनकारियों को कानूनी और मेडिकल मदद पहुंचा रहे हैं। आंदोलन पीछे हटने वाला नहीं है। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने स्थल पर मंच को बरकरार रखा और उस पर वांगचुक की तस्वीर के साथ संविधान की एक प्रति, रामचरितमानस, एक चरखा और बुद्ध की एक छोटी प्रतिमा रखी।
