नोएडा

Noida में 5% आबादी प्लाटों का आवंटन, किसानों की हो गई चांदी; इन गांवों में आई खुशी की लहर

नोएडा प्राधिकरण में चार गांवों बसई बहाउद्दीन नगर, चोटपुर, सरफाबाद और याकूबपुर के 23 भूखण्डों के आवंटन पत्र किसानों और उनके उत्तराधिकारियों को वितरित किए गए।

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(फाइल फोटो)

नोएडा: नोएडा विकास प्राधिकरण के मुख्यालय में शुक्रवार को किसानों को पांच प्रतिशत आबादी भूखंडों के आवंटन पत्र दिए गए। इस मौके पर स्थानीय विधायक पंकज सिंह और प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोकेश एम. भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम के तहत चार गांवों बसई बहाउद्दीन नगर, चोटपुर, सरफाबाद और याकूबपुर के 23 भूखण्डों के आवंटन पत्र किसानों और उनके उत्तराधिकारियों को वितरित किए गए। इन भूखण्डों का कुल क्षेत्रफल लगभग 4,400 वर्ग मीटर है।

2,226 भूखण्डों के आवंटन पत्र पहले ही जारी

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि जनवरी 2017 से दिसंबर 2024 तक कुल 2,226 भूखण्डों के आवंटन पत्र (क्षेत्रफल लगभग 3,09,760 वर्ग मीटर) पहले ही जारी किए जा चुके हैं। नोएडा प्राधिकरण की नीति के अनुसार, अर्जित भूमि के बदले प्रभावित किसानों को पांच प्रतिशत आबादी भूखण्ड दिए जाते हैं। इस नीति के तहत आवंटन पत्रों की प्रक्रिया पूरी गंभीरता और प्राथमिकता के साथ की जाती है।

मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने विधायक को आश्वस्त किया कि शेष भूखण्डों का नियोजन कर आने वाले समय में और भी आवंटन पत्र जारी किए जाएंगे, ताकि प्रभावित किसानों को अधिक लाभ मिल सके। इस कार्यक्रम में नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों और काश्तकारों ने भाग लिया, जिससे किसानों और प्राधिकरण के बीच सामंजस्य और सौहार्दपूर्ण वातावरण बना।

गौरतलब है कि अपनी इसी एक प्रमुख मांग को लेकर किसान लगातार नोएडा प्राधिकरण के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण की तरफ से यह आश्वासन किसानों को दिया गया था कि जल्द से जल्द निस्तारण शुरू हो जाएगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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