पूर्वी दिल्ली में मयूर विहार फेस-1 से नोएडा में सेक्टर 94 के पास महामाया फ्लाईओवर तक चिल्ला एलिवेटेड रोड को लेकर कई बार खबरें आपने पढ़ी होंगी। 5.5 किलोमीटर लंबे इस 6 लेन के फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड को बनाने की योजना आज से 12 साल पहले बनाई गई थी। यह एलिवेटेड रोड शाहदरा ड्रेन के साथ-साथ मयूर विहार फेस-1 से महामाया फ्लाईओवर तक बनाई जानी है। इस एलिवेटेड रोड के बन जाने के बाद मयूर विहार से महामाया फ्लाईओवर की ओर फिल्म सिटी के आसपास और महामाया फ्लाईओवर से मयूर विहार की ओर दलित प्रेरणा स्थल के आसपास जाम की समस्या खत्म हो जाएगी। यह एलिवेटेड रोड दिल्ली को सीधे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से जोड़ देगा। अब इस एलिवेटेड रोड को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है।
जल्द शुरू होगा काम
इस एलिवेटेड रोड को लेकर अपडेट ये है कि इस पर इसी साल दिसंबर में काम शुरू हो सकता है। नोएडा अथॉरिटी ने इसके लिए 105 करोड़ की फाइल को मंजूरी देकर वित्तीय समिति के पास भेज दिया है। वित्तीय समिति की तरफ से इसका अध्ययन करके इसे अंतिम स्वीकृति मिल जाएगी। इसके बाद एलिवेटेड रोड बनाने वाली कंपनी के साथ करार भी होगा।12 साल पहले जब इस एलिवेटेड रोड की योजना बनाई गई थी, तब से इसकी अनुमानित लागत में भी काफी उछाल आया है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड ने इस परियोजना में 153 करोड़ रुपये अतिरिक्त लागत की संभावना जताई थी। इसके बाद अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम ने शासन से मार्गदर्शन और अतिरिक्त लागत की मंजूरी के लिए अनुमति पत्र लिखा था। दिशा-निर्देश मिलने के बाद सीईओ ने 105 करोड़ की फाइल को वित्तीय समिति के पास भेज दिया है।
बता दें कि इसी साल यानी जून 2024 में इस 5.5 किलोमीटर के एलिवेटेड रोड को बनाने के लिए पंचकुला की MG कॉन्ट्रैक्टर्स का चुनाव हुआ था। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने अथॉरिटी को बताया था कि इस एलिवेटेड रोड के निर्माण की लागत लगभग 701 करोड़ रुपये है और MG कॉन्ट्रैक्टर्स इसे 624 करोड़ में बनाने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगमके ज्वाइंट एमडी संदीप गुप्ता ने बताया था कि जीएसटी, लेबर सेस और अन्य खर्चों को जोड़कर इस एलिवेटेड रोड को बनाने की कुल लागत 938 करोड़ रुपये आएगी।
बता दें कि सरकार पहले ही 892.7 करोड़ रुपये की मंजूरी इस एलिवेटेड रोड के लिए दे चुकी थी। बता दें कि इस एलिवेटेड रोड को बनाने का पहला सुझाव साल 2012 में आया था। लेकिन इन 12 वर्षों में इस प्रोजेक्ट को लेकर कई बार खबरें सामने आईं, लेकिन यह बार-बार ठंडे बस्ते में जाता रहा। 6 साल तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद साल 2018 में दिल्ली सरकार ने इसे मंजूरी दी थी।
