नोएडा के 900 से अधिक ऑटो में सफर करना खतरनाक साबित हो सकता है। जानकारी के मुताबिक, इन ऑटो की फिटनेस की जांच नहीं कराई जाती है। ऐसे में ये ऑटो सड़कों पर चलने लायक नहीं रह जाते हैं। परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नोएडा में तकरीबन 19000 ऑटो पंजीकृत हैं। इनमें से 918 ऑटो की फिटनेस खत्म हो चुकी है। ये सभी यात्री ऑटो हैं। विभाग का कहना है कि, ऑटो मालिकों और चालकों को फिटनेस जांच कराने के लिए कई बार नोटिस भेजा गया है, लेकिन उन्होंने इसे अनदेखा कर जांच नहीं कराई है।
एआरटीओ प्रशासन डॉ. सियाराम वर्मा के मुताबिक, बिना फिटनेस जांच के ऑटो में सफर करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। यह यात्री और चालक की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के वाहन चलाने पर चालान कट सकता है और ऑटो सीज भी किए जा सकता है। अगर वाहन के पास फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं है और दुर्घटना होती है तो बीमा कंपनी क्लेम नहीं देती है। एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडेय ने कहा कि अगर लोगों को सड़कों पर ऑटो समेत अन्य जर्जर वाहन चलते नजर आते हैं तो वे इसकी सूचना सेक्टर 33 स्थित परिवहन विभाग कार्यालय में दे सकते हैं।
कैसे करें फिटनेस जांच?
परिवहन विभाग की अधिकारिक वेबसाइट www.parivahan.gov.in पर वाहन की फिटनेस के लिए आवेदन के बाद फिटनेस जांच प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसमें दिए गए टाइम स्लॉट पर वाहन को जांच के लिए परिवहन विभाग कार्यालय में लाना पड़ता है। परिवहन विभाग के अधिकारी स्पीड गर्वनर, ब्रेक, क्लच, वाहन की बॉडी, लाइट, गेयर समेत वाहन के हर हिस्से की अच्छी तरह जांच करते हैं। वाहन के पार्ट्स दुरुस्त मिलने पर फिटनेस जांच प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। एआरटीओ प्रशासन डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि ऑटो में कार्यरत मीटर लगा होना अनिवार्य है। अगर मीटर नहीं लगा होता है या खराब रहता है, तब भी ऑटो की फिटनेस जांच नहीं की जाती है।
