हर तरफ खौफ, एक के बाद एक 12 लोगों की मौत से हर तरफ डर का माहौल। डर के सन्नाटे के बीच, हर मौत के साथ परिजनों की चीख से पूरा गांव गूंज उठता है। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि हरियाणा में पलवल जिले के छायंसा गांव में दहशत का आलम है। यहां एक अजीब सी रहस्यमयी बीमारी ने हर तरफ दहशत का माहौल पैदा कर रखा है। सिर्फ 15 दिनों में ही 12 लोगों की इस रहस्यमयी बीमारी के चलते मौत हो गई है। मरने वालों में 5 तो स्कूल जाने वाले बच्चे थे। ग्रामीणों समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में हो रही मौतों का कारण क्या है। उनका कहना है कि उनके गांव को किसी की नजर लग गई है।
ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिन पहले दो-तीन लोगों की तबीयत बिगड़ी और फिर अचानक तीन लोगों की मौत हो गई। इसके बाद मौत का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह थमने का नाम नहीं ले रहा। गांव के लगभग हर घर में मरीज हैं, जिनमें से कुछ की सेहत बहुत नाजुक स्थिति में है। परिजन सरकारी अस्पतालों से लेकर क्षेत्र के प्राइवेट हॉस्पिटलों तक के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। इसके बावजूद उनके बीमार परिजनों की स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा। लगातार मौत की खबरों के बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जरूर गांव में डेरा डाल लिया है, लेकिन हालात अब भी काबू में नहीं हैं।
शनिवार 14 फरवरी को जब स्वास्थ्य विभाग की टीम छायंसा गांव पहुंची तो यहां हर घर में मरीज मिले। टीम ने पूरे गांव की स्क्रीनिंग और ब्लड सैंपल इकट्ठे किए। ज्यादातर लोगों में बुखार, खांसी, बदन दर्द और उल्टी जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। जितने लोगों की मौत हुई है, उनमें भी यही लक्षण थे।
छायंसा गांव में लोगों के चेहरे पर डर साफ देखा जा सकता है। हर दूसरे घर में कोई न कोई व्यक्ति बीमार है। स्वास्थ्य कैंप में जाकर भी कुछ लाभ होता नहीं दिख रहा। इधर कुछ लोग देसी उपचार और झाड़-फूंक से अपने परिजनों को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जाने गांव में किसी ने क्या करवा दिया है। पिछले 15 दिन में जिन 12 लोगों की मौत हुई है, उनमें दो बच्चे पायल व हुफैज, दो किशोरियां सारिका व हुमा, पांच बुजुर्ग जामिला, आशिया, इंद्रवती, हसन, नासिर, तीन युवक दिलशाद, हब्बू, शमशुद्दीन शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में डाला डेरा
क्या हो सकता है कारण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हेपेटाइटिस-बी और सी इन मौतों की वजह हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 4 मौतों के पीछे हेपेटाइटिस बी और सी कारण बताया है। जबकि 3 मामलों में मल्टीपल ऑर्गन फैलियर और लिवर इंफेक्शन का केस बताया। हालांकि, गांव में लगातार हो रही मौतों के पीछे कोई सटीक कारण अभी तक सामने नहीं आया है।
इस मामले में हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव का कहना है, सच बात यह है कि आंकड़े तभी सामने आते हैं, जब कोई अस्पताल लेकर आता है और उसकी जांच होती है। उन्होंने बताया कि उनके पास कुल 11 मामले आए थे, इनमें से 7 मरीजों में हेपेटाइटिस सी पाया गया है। 7 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा, हमने जांच शुरू कर दी है, जांच में अब तक यह भी सामने आया है कि झोलाछाप डॉक्टर के द्वारा लगाए गए इंजेक्शन से भी हेपेटाइटिस फैल सकता है, हमने झोलाछाप डॉक्टरों की भी जांच कराई है। उन्होंने कहा, हेपेटाइटिस इंजेक्शन के माध्यम से आसानी से फैलता है।
1 फरवरी को पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
स्वास्थ्य विभाग के डॉ. मंजीत ने के अनुसार उन्हें 31 जनवरी को गांव में हो रहीं मौतों के बारे में जानकारी मिली। 1 फरवरी को उन्होंने गांव से जांच के लिए सैंपल लेने शुरू किए। मृतकों के मेडिकल रिकॉर्ड को जांच के आदेश दिए गए। इसके बाद सभी की मेडिकल रिपोर्ट की जांच की गई, जिसमें उनको मौत के कारणों का पता चला। अभी तक गांव से 300 ब्लड सैंपल की जांच की गई है, जिनमें से 2 में हेपेटाइटिस बी और सी का पता चला है। 400 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।
पलवल CMO डॉ सत्येंद्र वशिष्ठ ने बताया कि घरों से पीने के पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं। अभी तक 107 में से 23 सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें बैक्टीरिया ग्रोथ पायी गई है। ज्ञात हो कि हेपेटाइटिस बी और सी के लक्षण काफी मिलते-जुलते होते हैं। हेपेटाइटिस बी एक वायरल इंफेक्शन है और लिवर को प्रभावित करता है। यह वायरस संक्रमित खून, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सूई या मां से शिशु में फैल सकता है। हेपेटाइटिस सी लंबे समय तक शरीर में बिना लक्षण के रह सकता है और धीरे-धीरे लिवर को बेहद गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
खौफ में पांच हजार की आबादी
छायंसा में की आबादी 5 हजार है। यहां कई घरों में पीने के लिए टैंकर का पानी इस्तेमाल किया जाता है। गांव के सरपंच मोहम्मद इस्लाम के अनुसार गांव में तीन जगहों से पानी की सप्लाई होती है, कुछ घरों में सरकारी पानी की सप्लाई है।
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