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आसमान से आ रहा तबाही का Asteroid 'City Killer', मुंबई के लिए खतरे की घंटी; जानें सब कुछ

आसमान से तबाही का एस्टेरॉयड आ रहा है, जिसे सिटी किलर नाम से पहचान मिली है। वैसे इसका नाम Asteroid 2024 YR4 है। लेकिन इसके धरती से टकराने पर पूरा शहर तबाह हो सकता है, इसलिए इसे सिटी किलर कहा जा रहा है। इससे हमारे अपने मुंबई शहर को भी खतरा है। चलिए जानते हैं इसके बारे में सब कुछ -

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मुंबई सहित कई शहरों पर मंडरा रहा खतरा

अभी मुंबई की जनसंख्या करीब 2 करोड़ 70 लाख है। इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए लिए नासा ने एक बड़ी डराने वाली बात कही है। मुंबई के ऊपर एक एस्टेरॉयड का खतरना मंडरा रहा है। जिसे 'City Killer' के नाम से बुलाया जा रहा है। मतलब अगर यह एस्टेरॉयड धरती से टकराया तो पूरा शहर तबाह हो जाएगा। शहर में कुछ भी नहीं बचेगा, यह सब कुछ तहस-नहस कर देगा। इस एस्टेरॉयड का नाम Asteroid 2024 YR4 रखा गया है, लेकिन एक पूरे शहर को तबाह करने की इसकी क्षमता के चलते इसे सिटी किलर कहा जा रहा है। चलिए जानते हैं इस बारे में और बारीकी से -

Asteroid 2024 YR4 पर खगोलशास्त्रियों यानी एस्ट्रोनॉमर्स की कड़ी नजर है। वह दिसंबर 2024 में इसकी खोज के बाद से ही इस पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। यह एस्टेरॉयड हमारे ब्रह्मांड में घूम रहा एक बड़ा से पत्थर का टुकड़ा या Rock है।

धरती से टकराने के कितना पर्सेंट चांस हैं?

खुले ब्रह्मांड में घूम रहे इस रॉक के धरती से टकराने की आशंका सिर्फ 1.5 फीसद थी, जो बीच में 3.1 फीसद तक कई। जो अब कम होकर .28 फीसद हो गई है। आम तौर पर आप देखेंगे तो यह संभावना बहुत कम है, लेकिन इसकी भयावहता का अंदाजा लगाएं। अगर वह 1.5 फीसद आशंका ही सच साबित हो गई तो पूरा शहर तबाह हो जाएगा, इसके कारण इसे सिटी किलर बुलाया जा रहा है।

कब टकरा सकता है धरती से

इस रॉक के धरती से टकराने की संभावना भले ही कम हो। लेकिन अगर यह धरती से टकराता है तो वह किसी शहर के लिए कयामत के दिन से कम नहीं होगा। अगर बात करें दिन की तो वैज्ञानिकों के अनुसार यह एस्टेरॉयड 22 दिसंबर 2032 को धरती से टकरा सकता है। इसके धरती से टकराने की गुंजाइश 1 फीसद से ज्यादा है, इसलिए NASA सहित दुनियाभर की स्पेस एजेंसियां इस पर काम कर रही हैं और इसकी ट्रैजिक्टरी पर नगर बनाए हुए हैं।

कहां टकराएगा यह एस्टेरॉयड

मुंबई की बात तो हम कर चुके हैं। लेकिन इसकी ट्रैजिक्टरी पर खगोलशास्त्री नजदीकी नजर बनाए हुए हैं। खगोलशास्त्रियों ने इसका एक सिमुलेशन भी पोस्ट किया है। जिसमें यह दिखाया गया है कि यह सिटी किलर एस्टेरॉयड कहां टकरा सकता है। नासा के अनुमान के आधार पर साइंटिफिक अमेरिकन के अनुसार यह एस्टेरॉयड पूर्वी प्रशांत महासागर से दक्षिण एशिया के क्षेत्र में कहीं भी टकरा सकता है।

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लाल रेखा पर बसे इलाकों में टकरा सकता है

चिंताजनक बात ये है कि इस क्षेत्र में बड़ी आबाद रहती है इसमें बगोटा, कोलंबिया, लागोस, नाइजीरिया और आमची मुंबई भी शामिल है। भारत की बात करें तो यह मुंबई के अलावा नागपुर, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी गिर सकता है।

चंदा मामा भी खतरे में

जी हां, इस एस्टेरॉयड के हमारे चांद पर टकराने की भी आशंका है। हालांकि, यह आशंका बहुत कम थी, जो अब बढ़कर 1 फीसद तक पहुंच गई है। अगर यह एस्टेरॉयड चांद से टकराता है तो चंदा मामा को भी भारी नुकसान हो सकता है।

कितना बड़ा है एस्टेरॉयड

जिस एस्टेरॉयड को सिटी किलर का तमगा मिला है, वह स्वयं कितना बड़ा होगा? यही प्रश्न आपके भी मन में होगा। तो बता दें कि इसकी माना जा रहा है यह 130 से 300 फीट चौड़ा होगा। इसे आसानी से समझने के लिए बा दें कि यह एक दफ्तर के आकार की बिल्डिंग के बराबर का पत्थर का टुकड़ा है। अगर यह एस्टेरॉयड धरती से टकरता है तो फिर चाहे यह आसमान टुकड़े-टुकड़े हो जाए या धरती पर एक बड़ा सा क्रेटर यानी गड्ढा बना दे। इससे निकलने वाली ऊर्जा किसी हाइड्रोजन बन की तरह होगी। इसकी शक्ति से पूरा का पूरा शहर तबाह-ओ-बर्बाद हो जाएगा।

अब अच्छी खबर

हालांकि, अच्छी खबर ये है कि इसके धरती से टकराने की आशंका हर एक दिन की रिसर्च के साथ और कम हो रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में Apophis की तरह इस सिटी किलर के भी धरती टकराने की आशंका शून्य हो जाएगी। उनका मानना है कि इसके धरती से टकराने की आशंका अगले कुछ महीनों में या वर्षों में शून्य हो जाएगी।

इसके बावजूद खगोलविद अपनी तरफ से कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। इस संबंध में नासा दुनियाभर की अन्य स्पेस एजेंसियों जैसे चीन की स्पेस एजेंसी CNSA, रूस की Roscosmos और यूरोपीय स्पेस एजेंसी ESA के साथ मिलकर काम कर रहा है। ताकि इस एस्टेरॉयड के पाथ को ठीक से समझा जा सके। खगोलविदों की एक टीम नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप का इस्तेमाल करके मार्च और मई में इस एस्टेरॉयड के आकार और ट्रैजिक्टरी यानी रास्ते को समझेंगे। क्योंकि इसके बाद यह नजरों से ओझल हो जाएगा और फिर साल 2028 की शुरुआत में धरती के और करीब आएगा।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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